एक नहीं पांच शरीर हैं हमारे, जानिए कौन से

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हमारेपांचप्रकारकेशरीरहैं।हमारापहलाशरीरहमारावातावरणहै।अगरवातावरणज़हरीलाहोतोहमारायहशरीरउसमेंनहींरहसकता।इसेअन्नरसमयकोषकहतेहैं।भोजनकेवलवहीनहींहैजोहमखातेहैं।फेफड़ोंकेलिएहवाभोजनहै।पानीभीहमारेइसशरीरकेलिएएकभोजनहै।ऊष्माभीएकतरहकाभोजनहै।अगरहम -40 डिग्री सेल्सियस केतापमानमेंहैंतोचाहेजितनाभीभोजनक्योंनाहोहमजीवितनहींरहपाएंगे।इसलिएतापभीहमारेलिएभोजनहै।आनंदऔरशांतिहमारीआत्माकेलिएभोजनहै।

दूसरा है प्राणमय कोष, प्राण उर्जा। आप अनुभव कर सकते हैं कब उर्जा कम है और कब उर्जा अधिक है। अगर आप किसीऐसे स्थान पर जाते हैं जहाँ कम उर्जा है तो आपका वहाँ से भाग जाने का मन होता है और जिस जगह उर्जा अधिक होतीहै आप वहां समय व्यतीत करने के इच्छुक होते हैं। आप में से कितनों का यह अनुभव है।
आप अपने शरीर में ताज़ा भोजन और डिब्बा बंद भोजन का प्रभाव महसूस कर सकते हैं। ताज़े भोजन में कई दिनों के जमेभोजन की तुलना में अधिक प्राण होते हैं। इसी तरह से ताज़े फल और सब्ज़ी में अत्याधिक पके हुए भोजन से अधिक प्राणहोते हैं। तो दूसरा है प्राणमय कोष।

तीसरा है श्वास। आप अपने शरीर का ध्यान रख सकते हैं पर अगर आप सांस नहीं ले रहे तो या आपका शरीर मिट्टी मेंदफना दिया जाता है या राख बन जाता है। हमारे भौतिक शरीर का मूल्य श्वास से ही है। शरीर की  90 प्रतिशत टॉक्सिन्स श्वास से ही बाहर जाते हैं और केवल 10 प्रतिशत म मूत्र या पसीने से।

उसके बाद है मनमय कोषमन के विचार। क्या आप अपने मन में घटित होने वाले विचारों के प्रति सजग हैं? यह हमारेशरीर की चौथी परत है। फिर अंत में परमांनद। इस तरह हमारे पांच प्रकार के शरीर हैं|