देश को खतरा हुआ तो न्यूक्लियर पॉलिसी पर नहीं सोचूंगा: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर

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 रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भारत की ओर से पहले न्यूक्लियर हमला नहीं करने की देश की न्यूक्लियर पॉलिसी पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिससे एक नए विवाद का जन्म हो चुका है। पर्रिकर ने गुरुवार को कहा कि उनकी राय में भारत को पहले न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल नहीं करने की पॉलिसी से नहीं बंधे रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्यों नहीं कह सकते कि हम जिम्मेदार न्यूक्लियर पावर हैं और हम इसका गैरजिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल नहीं करेंगे।
देश को खतरा हुआ तो नहीं सोचूंगा
पर्रिकर ने ये बातें न्यूक्लियर पॉलिसी के बारे में पूछे गए एक सवाल के दौरान कहीं। हालांकि इसे उन्होंने अपनी निजी राय बताया। उन्होंने कहा कि अगर पहले से तैयार रणनीति का पालन किया जाए अथवा आप न्यूक्लियर मुद्दे पर किसी रुख पर कायम रहते हैं तो मुझे लगता है कि आप न्यूक्लियर हथियार के मामले में अपनी शक्ति को खो रहे हैं। कोई आपके बारे में पूर्वानुमान नहीं लगा सके, यह रणनीति का हिस्सा है। लेकिन हमारे पास पहले से तय चीजें होनी चाहिए ताकि सामान्य तौर पर हम उसी के मुताबिक आगे बढ़ते रहें। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर जब देश को किसी तरह का खतरा होगा तो मैं पहले से तय चीजों के बारे में नहीं सोचूंगा।
डिफेंस मिनिस्ट्री ने बताया या निजी राय
हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इसे पर्रिकर की निजी राय बताया है और कहा है कि यह मंत्रालय का आधिकारिक रुख नहीं है। गौरतलब है कि न्यूक्लियर टेस्ट के बाद भारत ने दुनिया को भरोस दिया था कि वह इसका पहले इस्तेमाल नहीं करेगा।
कांग्रेस ने किया विरोध
पर्रिकर के इस बयान का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने इसे देश की न्यूक्लियर पॉलिसी के खिलाफ बताया है।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कोई धमकी नहीं
इसके अलावा पर्रिकर ने यह भी कहा कि कुछ लोग कह सकते हैं कि भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी में बदलाव आ गया है, लेकिन किसी भी सरकार के दौरान इस पॉलिसी में बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश से इस तरह की धमकियां मिलती थीं कि सुरक्षा का खतरा होने पर वह रणनीतिक तौर पर उसकी न्यूक्लियर पॉलिसी का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इस तरह की कोई धमकी नहीं मिली है।