शिवपाल की वापसी पर अखिलेश ने रखी शर्त, रामगोपाल को लेकर फंसा पेंच

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लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर दीवाली की तैयारियां शुरू हो गई हैं. लेकिन क्या दीवाली आने तक मुलायम परिवार के गृहयुद्ध का अंत हो पाएगा. क्या पिता और पुत्र के बीच की दूरियां खत्म हो पाएंगी. इन सवालों के जवाब का इंतजार मुलायम परिवार के साथ साथ पूरे प्रदेश की जनता को भी है.

दोनों चाचाओं पर आकर फंसा पेंच

हालांकि कल जो कुछ भी हुआ उसे देखते हुए सुलह के कोई आसार फिलहाल तो नहीं दिखते. सूत्रों के मुताबिक परिवार में झगड़े का पेंच अब अखिलेश के दो चाचाओं पर आकर फंसा हुआ है.

रामगोपाल को लौटाया जाए महासचिव पद

एक तरफ हैं शिवपाल यादव और दूसरी तरफ रामगोपाल यादव. शिवपाल यादव से नाराज होकर अखिलेश यादव ने जब उन्हें और उनके समर्थक तीन मंत्रियों को बर्खास्त किया तो जवाबी कार्रवाई करते हुए मुलायम सिंह ने रामगोपाल यादव को महासचिव पद से हटा दिया. सूत्रों के मुताबिक अब अखिलेश यादव चाहते हैं उनके खेमे के रामगोपाल यादव को पूरे मान सम्मान के साथ महासचिव पद लौटाया जाए.

अपनी-अपनी जिद पर अड़े अखिलेश-मुलायम!

बेटा जिद पर है तो बाप भी कम नहीं. रामगोपाल को वापस लाना तो दूर मुलायम ने उनसे जुड़े सवाल पर जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा.

रामगोपाल कभी मुलायम के भरोसेमंद और पार्टी के रणनीतिकार हुआ करते थे लेकिन अब वो मुलामय की नजरों से उतर चुके हैं, क्योंकि मुलायम मानते हैं कि रामगोपाल ने ही अखिलेश को उनके खिलाफ भड़काया है.

शिवपाल की वापसी के सवाल पर मुलायम ने नहीं दिया कोई जवाब

इसीलिए रामगोपाल को पार्टी से बाहर करने के बाद नेताजी चाहते थे हैं कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके एक तरफ बेटे अखिलेश यादव और दूसरी तरफ भाई शिवपाल यादव बैठें और वो ये एलान कर सकें कि ‘ऑल इज वेल’ लेकिन ऐसा हो न सका. अखिलेश नहीं आए. बेटे की बगावत ने पिता को बेबस कर दिया. ये मुलायम की बेबसी ही थी कि मंत्रिमंडल में शिवपाल की वापसी के सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं था.

परिवार में सुलह की तमाम कोशिशें फेल होती जा रही हैं. चुनाव में अखिलेश को पार्टी का चेहरा बनाने के सवाल पर मुलायम का यू टर्न इस झगड़े को और आगे ले जाएगा. यही वजह है कि मुलायम की फटकार के बाद भी अखिलेश समर्थकों की नारेबाजी जारी है.