10 साल तक चुनावी राजनीति से बाहर रहेंगी शशिकला

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शशिकला ने हेल्थ कारणों का हवाला देते हुए सरेंडर के लिए वक्त देने की अर्जी लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम फैसले में सबकुछ कह चुके हैं। उसमें से एक शब्द का भी हेरफेर नहीं होगा।” कोर्ट ने शशिकला को तुरंत सरेंडर करने को कहा। कोर्ट ने शशिकला की तरफ से पेश हुए वकील से कहा, “उम्मीद है कि आप तुरंत का मतलब जानते होंगे|”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अपने भारी-भरकम फैसले में सारी बातें कही जा चुकी हैं। अब उसमें से एक शब्द भी नहीं बदला जाएगा।”
सीनियर एडवोकेट केटीएस तुलसी शशिकला की तरफ से कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने सरेंडर के लिए कुछ वक्त दिए जाने की अपील की।कोर्ट ने बुधवार को तुरंत शब्द का इस्तेमाल किया। जस्टिस पीसी घोष ने शशिकला के वकील से कहा, “मुझे उम्मीद है कि आप तुरंत शब्द का मतलब समझते होंगे|”
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शशिकला को बेहिसाब प्रॉपर्टी (डिसप्रपोर्शनेट एसेट-DA) मामले में दोषी करार दिया था। कोर्ट ने पूरा फैसला महज आठ मिनट में सुना दिया। 21 साल से ये मामला चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के 4 साल की सजा के फैसले को बरकरार रखा। 10 करोड़ जुर्माना लगाया।
अब शशिकला (60) को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर जेल जाना होगा। 6 महीने की सजा वे काट चुकी हैं। उन्हें साढ़े तीन साल जेल में गुजारने होंगे।फैसले के साथ ही शशिकला का पॉलिटिकल करियर एक तरह से खत्म हो गया है। 4 साल की सजा पूरी करने के बाद वे 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी|
बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसी केस में शशिकला और जयललिता को 2015 में बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- करप्शन बेईमानी और गलत तरीके से पैसा कमाने और फायदा उठाने का जरिया है। मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि 34 कंपनियां सिर्फ कानून की आंख में धूल झोंकने और बेहिसाबी संपत्ति को जस्टिफाई करने के लिए बनाई गईं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले से साबित होता है कि बड़े पैमाने पर असेट्स को ठिकाने के लिए साजिश रची गई। जस्टिस रॉय ने कहा कि पब्लिक लाइफ में करप्शन का यह केस एक नमूना है। कुछ लोग पावर का गलत फायदा उठाते हैं, और इंस्टीट्यूशनल नॉर्म्स को तोड़ा जाता है|
जयललिता ने जया पब्लिकेशन की पावर ऑफ अटॉर्नी शशिकला को दी ताकि वे कानूनी दायरे में ना आएं।दोनों ने कई कंपनियां बनाईं। उनका काम बिजनेस नहीं था। सिर्फ प्रॉपर्टी खरीदना था। ये कंपनियां जयललिता के घर से ही चल रही थीं।शशिकला और उसके दो रिश्तदारों ने बेहिसाब प्रॉपर्टी खड़ी करने में जयललिता का साथ दिया। प्रॉपर्टी बेचकर बाद में ये लोग काली कमाई इकट्ठा कर रहे थे|
फैसले के मुताबिक, शशिकला और उनके दो आरोपी रिलेटिव्स को बेंगलुरु की ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना होगा।बेंच ने ये भी कहा कि चूंकि जयललिता की मौत हो चुकी है। लिहाजा उनके खिलाफ मामला खत्म हो जाता है प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक, “आज सुप्रीम कोर्ट का लैंडमार्क जजमेंट आया है। शशिकला को बेहिसाब प्रॉपर्टी मामले में दोषी पाया गया है। ट्रायल कोर्ट ने भी उनके खिलाफ फैसला सुनाया था। लगातार केस चलता रहा। लोग मायूस हो गए थे।सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जस्टिस माइकल कुन्हा के फैसले पर अमल करने का आदेश दिया है|”
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “मुझे इसी फैसले की उम्मीद थी। मुझे नहीं लगता कि वो अब सजा से भाग पाएंगी।”
पूर्व एडवोकेट जनरल बीवी आचार्य ने कहा, “फैसले में न्याय हुआ है। इससे लगता है कि ज्यूडिशियरी मजबूत है और आजादी से फैसला ले सकती है|”