CRPF जवान के अपमान पर पीएम से लेकर सांसदों की चुप्पी से हुआ साबित, ‘कमज़ोर देश है भारत

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सुल्तानपुर. जम्मू कश्मीर में चुनाव सम्पन्न कराकर लौटे सेना के जवान को उग्रवादी द्वारा मार कर अपमानित करने के मुद्दे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के ज़िला संरक्षक अरविंद सिंह राजा एडवोकेट ने बैठक कर महामहिम को कड़े तेवर के साथ पत्र लिखा है। पत्र में खास बात ये है कि
इस अहम मुद्दे पर प्रधानमंत्री से लेकर घड़ी-घड़ी संसद में हंगामा काटने वाले सांसदों की चुप्पी से ये साबित हो गया है कि भारत कमज़ोर देश है।

जानें और क्या कहा

बता दें कि एडवोकेट अरविंद सिंह राजा की गिनती दीवानी न्यायालय के  टाप-टेन अधिवक्ताओं में पहले नम्बर पर होती है।
साथ श्री सिंह अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के ज़िला संरक्षक हैं, और इसी के बैनर तले सीआरपीएफ जवान के साथ हुई घटना पर बैठक कर उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि जो सांसद शिवसेना के सांसद के बचाव, ममता बनर्जी के सर काटने और इस पर ईनाम देने वाले व्यक्ति के खिलाफ जागरुक दिखे।
लेकिन सीआरपीएफ जवान के साथ हुई घटना पर संसद भवन में वही सांसद और उनके साथ देश के प्रधानमंत्री की चुप्पी के आचरण ने देश के 125 करोड़ नागरिकों एवं सेना के जवानों का मनोबल गिराया है।
एडवोकेट ने खुले तौर पर लिखा है कि ऐसे मनोबल के साथ ये देश कभी भी आतंकवादियों से मुकाबला नहीं कर सकता।
उन्होंने लिखा कि इन सब चुप बैठने वालों को ध्यान होना चाहिए कि इन्हीं जवानों ने अपनी जान देकर सांसदों एवं सदन की रक्षा की थी।

सेना के जवानों को दी जाए अवाश्यक बल प्रयोग की छूट
वहीं राष्ट्रपति को भेजे पत्र में एडवोकेट श्री ने मांग किया है कि देश का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को आत्म रक्षा का अधिकार देता है, लेकिन यहां कि सरकार जवानों को मार खाने व अपमानित होने के लिए विवश करती है।
उन्होंने भेजे गए पत्र के माध्यम से मांग किया कि संसद की बैठक बुलाकर विचार-विमर्श हो और सेना के जवानों को अवाश्यक बल प्रयोग की छूट दी जाए।

कश्मीर में विधानसभा हो भंग लगे राष्ट्रपति शासन
कश्मीर मुद्दे पर बेबाकी से उन्होंने कहा कि कश्मीर की स्थित नियंत्रण से बाहर हो गई है।
यहां की जनता ने देखा कि जब देश के जवान खुद अपनी रक्षा नहीं कर पा रहे तो वो हमारी रक्षा क्या करेंगे?
इसी वजह से जनता मतदान करने नहीं आई और केवल 2 प्रतिशत मतदान हुआ।
इस स्थित में उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति से कश्मीर में विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा जानें की मांग किया है।