नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सहयोगी व कर्नल निजामुद्दीन का निधन

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आज सुबह कर्नल निजामुद्दीन का निधन हो गया। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सहयोगी व वाहन चालक रहे कर्नल निजामुद्दीन करीब 117 साल के थे। बुजुर्गवार ने आज भोर में ली अंतिम सांस। कर्नल मूलता आजमगढ़ जनपद ढकवा, मुबारकपुर के मूल निवासी थे। निजामुद्दीन एवं नेता जी का साथ कोई एक-दो दिन का नहीं, अपितु पूरो 10 वर्षाें से भी अधिक समय तक नेता जी के आन्दोलन का एक महत्वपूर्ण भाग बने रहे और विश्वसनीय अंगरक्षक के रुप में नेता जी की सभी गतिविधियों में शामिल रहे|

यहां तक की नेता जी जब जर्मन तानाशाह हिटलर से भारत की आज़ादी के लिये सहयोग मांगने गये तब भी निजामुद्दीन उनके साथ थे। इसके अतिरिक्त कई एशियाई देश के सेनानायकों, शासकों एवं सुल्तानों जैसे रोमल एवं हिचीमैन आदि लोंगो से भी भेंटवार्ता में निजामुद्दीन नेता जी के साथ रहे। नेता जी अपनी फौज के सहयोग के लिये टोकियो, जापान, नागासाकी, हिरोशिमा, वियतनाम, थाईलैण्ड, कम्बोडिया, मलेशिया एवं सिंगापूर आदि जहां भी गये, एवं युद्व की गुप्त योजनायें बनाये निजामुद्दीन उनके साथ-साथ रहे|

निजामुद्दीन उर्फ सैफुद्दीन शेख का जन्म सन् 1901 ई0 में मुबारकपुर थानान्र्तगत ढकवां गांव में हुआ था जिनकी उम्र आज 117 वर्ष से ऊपर हो चुकी है। इनके पिता का नाम इमाम अली था जो सिंगापूर में एक कैन्टीन चलाते थे और इनकी माता का नाम मुसलमां खातून था। इनके पांच भाई-बहन हैं। भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं तथा इनके दो भाई मु0 इजहार व मु0 इसमाईल तथा बहनें घूरा व सुग्गड़ थीं। जो अब इस दुनिया में नहीं है। इनकी पत्नि का नाम अजबुन्निसा है, जो आज 107 वर्ष की हो चुकी हैं। इनके एक पुत्री हबीबुन्निसा 85 वर्ष तथा पुत्र अख्तर अली 72 वर्ष, अनवर अली 65 वर्ष तथा शेख अकरम 55 वर्ष के हैं। यह अपनें छोटे पुत्र शेख अकरम के साथ अपने पैतृक निवास ढकवां में जीवन यापन कर रहे हैं|

एक बार कर्नल ने बताया था कि जब मैं लगभग 24-25 वर्ष का था तब मैं अपनी मां को बिना बताये घर से भागकर सिंगापूर अपनें पिता के पास चला गया तथा कैन्टीन पर काम करने लगा। चन्द दिनों बाद नेता जी सुबास चन्द्र बोस द्वारा आजाद हिन्द फौज नौजवानों की सिंगापूर में भर्ती चल रही थी और मैं भी उसी में भर्ती हो गया|