सीएम की समीक्षा बैठक में अफसरों की क्लास लगी

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मंडल के विकास कार्य तथा कानून-व्यवस्था की समीक्षा के क्रम में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में अधिकारियों के पेंच कसे। करीब चार घंटे की मैराथन बैठक में सीएम ने विकास कार्यों व कानून व्यवस्था के मामले में अफसरों को शिथिलता न बरतने के साथ ही हर प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेने को कहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता की शिकायते ना सुनने वाले 20 और अफसरों, 10 विकास प्राधिकरणों के वीसी और 10 नगर आयुक्तों को नोटिस थमाया।

लखनऊ में आज सीएम की समीक्षा बैठक में कानून व्यवस्था पर अफसरों की क्लास लगी। सीतापुर में ट्रिपल मर्डर के प्रकरण पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने एसपी से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही सीतापुर के एसपी को चेतावनी दी। इसके साथ ही सीएम विभागों में तालमेल की कमी पर नाराज भी हुए।
विकास कार्य के प्रकरण में सीएम की बैठक में आज बिजली-पानी का मुद्दा छाया रहा। बैठक में सीएम ने सांसद, मंत्री तथा विधायकों से भी फीडबैक लिया। बैठक में सीएम ने लखनऊ के साथ मंडल के सभी जिलों के अधिकारियों को कानून व्यवस्था शीघ्र सुधारने की चेतावनी दी। ग्राम प्रधान खराब हैंड पम्पों का रिबोर कराये। सभी सड़को की मरम्मत समय से करायी जाये। खराब होने वाले ट्रांफार्मर को समय पर बदलें। सीएम ने कहा कि हर जनप्रतिनिधियों की जायज बातों को सुना जाये। समीक्षा बैठक बाद सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानून व्यवस्था को लेकर बहुत ही गंभीर हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन-शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के सम्बन्ध में विकास प्राधिकरणों और नगर निगमों की समीक्षा बैठक की, जिसमें प्रदेश के 10 सबसे खराब विकास प्राधिकरणों तथा 10 सबसे खराब नगर निगमों से स्पष्टीकरण मांगे जाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जन-शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निस्तारण राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस सम्बन्ध में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वे इन अधिकारियों का स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए जन-शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गति लाया जाना सुनिश्चित करें।जन-शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में सर्वाधिक खराब प्रदर्शन करने वाले 10 विकास प्राधिकारणों के तहत लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, सहारनपुर, झांसी, मेरठ, आगरा, इलाहाबाद, गोरखपुर तथा गौतमबुद्धनगर विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी प्रकार गाजियाबाद, कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, झांसी, आगरा, बरेली, इलाहाबाद तथा सहारनपुर नगर निगमों के नगर आयुक्तों से जवाब-तलब किए जाने के निर्देश दिए हैं।

source-DJ