सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को लगाई फटकार, डीएम और एसपी शिकायतों की रोज समीक्षा करें

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन शिकायतों के निस्तारण नहीं होने पर अपने ऑफिस में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जन सुनवाई प्रणाली में शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। उन्होंने इस काम में ढिलाई पर अफसरों को फटकार भी लगाई। आज़मगढ़, वाराणसी, गौतमबुद्ध नगर, इलाहाबाद, लखनऊ, प्रतापगढ़, सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी और सुल्तानपुर जिलों के डीएम और एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि सभी अफसरों को कहा गया था कि प्रशासन जनता के प्रति संवेदनशील रहे। समयबद्ध शिकायतों का निस्तारण हो, लेकिन तहसील और थानों से संबंधित समस्याएं लखनऊ आ रही हैं।

सीएम ने कहा कि अगर ये समस्याएं वहीं दूर हो जाएं तो लोग लखनऊ नहीं आएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता दर्शन कार्यक्रम में उनके पास रोज 4 से 6 हज़ार शिकायतें आती हैं। इनमें तमाम सामान्य सी शिकायतें हैं, लेकिन निचले स्तर पर वे दूर नहीं हो रही हैं। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिनका समाधान तहसील व थानों पर होना चाहिए वो वहां नहीं हो पा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फरियादियों की समस्या सामान्य सी होती है। ज़मीन कब्ज़ा करना, मुकदमा दर्ज ना होना और विवेचना में समय लगना आदि, ये रूटीन कार्य ही है लेकिन निचले स्तर पर इसे दूर नहीं किया जा रहा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गौतम बुद्ध नगर में राशन कार्ड की शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को परेशान किया गया। यह आवश्यक है कि जिनसे सम्बंधित शिकायत है, उसे उसी स्तर पर दूर किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि 30 जून तक लंबित जितनी शिकायतें हैं, उनका 31 जुलाई तक निस्तारण होना चाहिए।

डीएम और एसपी शिकायतों की रोज समीक्षा करें। समीक्षा के दौरान 10 जिलों में प्रशासन से जुड़ी सबसे ज्यादा शिकायतें मिलीं। पुलिस के स्तर पर 3 लाख 7 हज़ार शिकायत है। आज़मगढ़, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी सुल्तानपुर और गौतम बुद्ध नगर के डीएम स्तर पर शिकायतें क्रमश: सबसे ज्यादा लंबित हैं। आज़मगढ़ में तो सबसे ज्यादा शिक़ायत है।