बात ना करके आतंकियों और उनके प्रायोजकों को अवसर उपलब्ध करा रहे हैं : शिवशंकर मेनन

9
SHARE

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने अपनी किताब ‘चॉइसेज- इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियाज फॉरेन पॉलिसी’ के औपचारिक विमोचन से पहले कहा, अगर आप बात नहीं करेंगे तो आप ऐसा नहीं करके आतंकियों और उनके प्रायोजकों को वह अवसर उपलब्ध करा रहे हैं, जो वे चाहते हैं। क्योंकि वे नहीं चाहते कि दोनों पड़ोसी देश आपस में बातचीत करें। वे दोनों देशों के बीच चर्चा को नियंत्रित करना चाहते हैं। वे हमारे आपसी संबंधों में रोक चाहते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि आप उन्हें ऐसा कैसे करने दे रहे हैं। बता दें कि मेनन पाकिस्तान में भारत के विदेश सचिव और चीन में राजदूत भी रह चुके हैं। शिवशंकर मेनन का कहना है कि हमारे पास पाकिस्तान के साथ मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के साथ बात नहीं करने से आतंकवादियों का मनोबल बढ़ेगा और इससे आतंकियों व उनके प्रायोजकों का एजेंडा पूरा हो जाएगा। बातचीत करने का यह मतलब नहीं है कि आप आतंकवादियों से निपटने के लिए अन्य जरूरी चीजें नहीं कर सकते। आपको आतंकवादियों का खात्मा करना पड़ेगा, जैसा कि किसी देश को करना चाहिए|

उन्होंने आगे कहा, लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि आप बातचीत बंद कर दें। यदि आपके पास मौका है तो बात कीजिए और उस समय आपके पास कहने को बहुत कुछ होगा। आप सीमापार आतंकवाद की वजह से संबंधों में गतिरोध नहीं चाहते और पाकिस्तान व पाकिस्तानी तत्वों के सहयोग से फसाद नहीं चाहते। मेनन ने कहा, हमें इस मुद्दे को उठाने और इसके बारे में बात करने की जरूरत है|

वह पाकिस्तान में विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के अगले महीने अमृतसर आने की खबरों के संबंध में बात कर रहे थे। सरताज अगले महीने की शुरुआत में अफगानिस्तान पर बहुराष्ट्रीय ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में हिस्सा लेने अमृतसर आ रहे हैं। इस संदर्भ में यह सवाल उठाने पर कि क्या उड़ी हमले और भारतीय सुरक्षाबलों द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बात क्यों नहीं होनी चाहिए|

मेनन ने कहा कि सैन्यबल के इस्तेमाल या भारत द्वारा सीमा पार आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की सीमित उपयोगिता थी। इससे सीमापार आतंकवाद और आईएसआई व जिहादी गुटों को प्रायोजित करने वाली पाकिस्तानी सेना का दिमाग बदलने वाला नहीं है और न ही इससे आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे नष्ट होने वाले हैं। कुछ बदलने वाला नहीं है। सीमापार पुप्त गतिविधियां’ पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी होती आई हैं। वे बोले, पीएम मनमोहन सिंह की सरकार ने इन्हें जनता में उजागर नहीं करने का फैसला किया, क्योंकि ये हमले जनता की राय को प्रभावित करने से कहीं अधिक नतीजों पर केंद्रित थे। यदि आपका उद्देश्य देश में ही जनता की राय को प्रभावित करता है तो आपको इसके परिणामों से निपटना होगा। इससे आमतौर पर लोगों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं और फिर बढ़ी हुई उम्मीदों को नियंत्रित करना चुनौती बन जाता है।मेनन ने कहा, जिस क्षण आप जनता के बीच जाओगे तो ये अनुमानित नतीजे नहीं आएंगे, क्योंकि तब दोनों पक्ष इसमें शामिल होंगे। दोनों पक्षों को यह देखना होगा कि वे डरे हुए नहीं हैं|

मनमोहन सिंह इन गुप्त गतिविधियों पर एक कारण से ही चुप रहे और वह कारण (उन्हें प्रचारित नहीं करना) अब भी वैध है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब पहले की तुलना में चीन के बहुत करीब आ गया है। भारत, पाकिस्तान संबंध छाप छोड़ेंगे और उन्हें संभावित रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।मेनन की इस किताब का विमोचन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे। इस किताब में भारत सरकार के नेताओं के समक्ष विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुश्किल फैसलों से निपटने और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए उनकी पसंद का जिक्र है|