BSP के खाते में 104 करोड़:10 साल से एक बार में 20 हजार से ज्यादा डोनेशन नहीं मिला

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ईडी के सर्वे में दिल्ली के यूनियन बैंक में बीएसपी के अलावा माया के भाई आनंद कुमार के अकाउंट में भी 1.43 करोड़ रुपए जमा होने की बात सामने आई है।मायावती की पार्टी बीएसपी के बैंक अकाउंट में 104 करोड़ रुपए जमा होने का खुलासा हुआ है। इलेक्शन कमीशन की गाइडलाइन के मुताबिक, अब उन्हें 20 हजार से ज्यादा के हर डोनेशन का सोर्स बताना होगा। कहा जा रहा है कि दोनों अकाउंट में ये रकम नोटबंदी के बाद जमा हुई है। इसकी जांच चल रही है|
इलेक्शन कमीशन की 2014 की गाइडलाइन्स के मुताबिक, पॉलिटिकल पार्टियों को कैश में डोनेशन नहीं लेने का सुझाव दिया गया था। कमीशन ने कहा था कि 20 हजार से ऊपर के किसी भी डोनेशन पर टैक्स में छूट नहीं मिलेगी|
पार्टी 10 साल से यही बात कह रही है। आमतौर पर बीएसपी और बाकी पार्टियां डोनेशन का 70-75% अमाउंट 20 हजार से कम और ज्यादातर अज्ञात सोर्स से दिखाती हैं, क्योंकि ऐसा बताने से इसका हिसाब कमीशन और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को नहीं देना पड़ता। इतना डोनेशन कहां से आया, इसकी सही जानकारी बैलेंस शीट और ऑडिट से पता चलेगी|
नियमों के मुताबिक, किसी भी पार्टी को इनकम की सालाना समरी, ऑडिट रिपोर्ट और फाइलें इलेक्शन कमीशन को देनी होती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में भी ऑडिट और बैलेंस शीट जमा करानी होती है|गाइडलाइन जारी होने के बाद एडीआर के सर्वे में सामने आया कि पार्टियों के कैश डोनेशन में 80% तक कमी आई। उन्होंने इसका मोड बदला और ज्यादातर डोनेशन चेक, आरटीजीएस या डीडी के जरिए होने लगे हैं|
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 13ए के मुताबिक, पॉलिटिकल पार्टियों को आयकर छूट मिली है। कमीशन चाहता है कि पार्टियां 2,000 रुपए से ज्यादा के डोनेशन का सोर्स बताएं। सरकार को भेजे सुझाव में कहा है कि पार्टियों को मिलने वाले 2000 रुपए से ज्यादा के ‘गुप्त’ चंदे पर रोक लगे|
हम तो सरकार से मांग कर चुके हैं कि आपने आम आदमी के लिए 2.5 लाख ट्रांजैक्शन की लिमिट लगा दी। लेकिन फिर भी किसी आदमी के खाते में एक करोड़ से ऊपर का ट्रांजैक्शन सामने आ रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। चूंकि यह खाता मायावती के भाई का है, पार्टी का नहीं, इसलिए उन्हें ईडी की जांच का सामना करना होगा|
बीएसपी सुप्रीमो ने मंगलवार को कहा, ”31 अगस्त से लगातार मैं उत्तर प्रदेश में रही हूं। उसी दौरान लोगों ने सदस्यता अभियान के जरिए ही ये पैसा जमा कराया। सहूलियत के हिसाब से लोग बड़े नोट ही लाते थे। ये वो वक्त था जब नोटबंदी नहीं हुई थी। इसी दौरान बीजेपी समेत दूसरी पार्टियों ने भी पैसा जमा कराया। मैं आपको बता दूं कि हमारे पास एक-एक पैसे का हिसाब है। निष्ठापूर्वक पैसे को जमा कराया गया|”