यूपी में भाजपा-निषाद पार्टी का गठबंधन, गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद भाजपा में शामिल

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लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच भाजपा ने यूपी में निषाद पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया है। इसके साथ ही गोरखपुर से वर्तमान सांसद प्रवीण निषाद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। गोरखपुर में लोकसभा उपचुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने प्रवीण निषाद को उम्मीदवार बनाया था। तब गोरखपुर की सीट योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी और यहां से भाजपा की हार को बहुत बड़ा संदेश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए झटका माना गया था।

दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में प्रवीण निषाद को वरिष्ठ बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और निषाद पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद भी मौजूद थे। संजय निषाद ने कहा कि यह बिना शर्त का गठबंधन है। सीटों को लेकर हमारी कोई मांग नहीं थी। मुख्य मुद्दा सामाजिक है। गोरखपुर सीट पर बीजेपी जिसे भी उतारना चाहे यह उसका फैसला होगा।

हालांकि संजय निषाद के ऐसे बयान के बावजूद माना यही जा रहा है कि भाजपा प्रवीण निषाद को ही गोरखपुर से उम्मीदवार बनाएगी। इसके अलावा एक और सीट निषाद पार्टी को दिए जाने की चर्चाएं हैं, यह सीट जौनपुर भी हो सकती है। बताते चलें कि संजय निषाद ने कुछ दिनों पहले ही समाजवादी पार्टी-बसपा के साथ गठबंधन किया था लेकिन दो दिन बाद ही अनदेखी का आरोप लगा कर अलग हो गए थे और उन्होंने कहा था कि वह मजबूर करके अपने सिंबल पर लड़ाना चाहते थे। निषाद पार्टी ने यह भी आरोप लगाया था कि अखिलेश यादव गठबंधन की अपनी सहयोगी बीएसपी प्रमुख मायावती के दबाव में काम कर रहे हैं।

संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी, इसी दौरान समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर सीट से सिटिंग एमपी प्रवीण निषाद का टिकट काटकर रामभुआल निषाद को अपना उम्मीदवार बनाया था। निषाद पार्टी और बीजेपी के बीच गठबंधन से पूर्वांचल की कई सीटों पर सियासी समीकरण बदल सकते हैं। वर्ष 2016 में गठित निषाद पार्टी का निषाद, केवट, मल्लाह, बेलदार और बिंद बिरादरियों में अच्छा असर माना जाता है। गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, बांसगांव, जौनपुर और वाराणसी समेत 16 लोकसभा सीटों पर निषाद समुदाय के वोट जीत-हार में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में तकरीबन 3.5 लाख निषाद हैं।