बीजेपी विधायक द्वारा राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वालों का सर काट लेने की खुली धमकी

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अयोध्या में राम मंदिर विवाद के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपना जाने के सुप्रीम कोर्ट की सलाह का बीजेपी ने जहां स्वागत किया है, वहीं हैदराबाद से उनकी ही पार्टी के एक विधायक ने राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने वालों का सिर काट लेने की खुली धमकी दी है.

38 साल के विधायक राजा सिंह तेलंगाना में बीजेपी के चीफ व्हीप हैं. फेसबुक पर अपलोड किए गए अपने एक  वीडियो में विधायक अपने समर्थकों को संबोधित करते दिखाए दे रहे हैं. वह कहते हैं –  ‘जो ये कहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण किया तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, हम उनके ऐसा बोलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि हम उनकी गर्दन काट सकें.’

अपने भाषण में वह व्हाट्सऐप पर शेयर किए गए एक अन्य वीडियो का जिक्र करते हैं, जिसमें ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहाद उल मुसलमीन या एआईएमआईएम के कुछ नेता कथित तौर पर यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि अगर अयोध्या में राम मंदिर बनाया गया तो वो देश में हंगामा खड़ा कर देंगे. इस पर हैदराबाद के गोशा महल से बीजेपी विधायक राजा सिंह कहते हैं- किसी में इतनी हिम्मत है कि राम मंदिर का निर्माण रुकवा दे? मुझे देखने दो. अगर ऐसा कोई बहादुर पैदा हुआ है जो राम मंदिर के निर्माण को चुनौती दे सके, तो मैं उसका सिर काट दूंगा.

बाद में इस बयान को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने अपने रुख को दोहराया और कहा राम मंदिर बनाने के लिए हम अपनी जान दे भी सकते हैं और दूसरों की जान ले भी सकते हैं.

पिछले महीने देश के प्रधान न्याधीश जेएस खेहर ने कहा था कि अयोध्या मसला संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा है और इसका समाधान अदालत के बाहर बातचीत के जरिये होना चाहिए. लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और योगी आदित्यनाथ से लेकर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत किया था. हालांकि बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा था कि हम कोर्ट को सूचित करना चाहेंगे कि अब आपसी बातचीत संभव नहीं है. हम पिछले 31 सालों से कोशिश करते रहे. अगर चीफ जस्टिस किसी बेंच को नामित करते हैं तो ऐसा हो सकता है.

बीजेपी पहले से ही कहती रही है कि वह अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संवैधानिक विकल्पों पर गौर करने के लिए कृतसंकल्प है. यूपी में चुनावों से पहले बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने कहा था कि मंदिर और विकास के मुद्दे के बीच कोई विरोधाभास नहीं है.