उपचुनावों में जीत के लिए भाजपा का बड़ा प्लान

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लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनावों में विराट जीत हासिल करने वाली भाजपा अब उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों के उपचुनाव को भी जीतने की तैयारी में जुट गई है। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में उपचुनावों में पार्टी का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है, इसीलिए इस बार पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। खास बात यह भी है कि जिन 12 सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें से 10 भाजपा के ही पास ही थी, इसीलिए भाजपा के सामने इन्हें बचाए रखने की भी चुनौती है।

इसीलिए इन 12 सीटों के लिए भाजपा विशेष रणनीति बना रही है। पार्टी ने 11 सीटों के लिए एक-एक मंत्री को जिम्मेदारी दी है वहीं पिछली बार हारी हुई जलालपुर सीट जीतने के लिए दो मंत्रियों की तैनाती की गई है। भाजपा उपचुनाव वाली सीटों पर जिताऊ उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने में जुटी है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर भाजपा कोर ग्रुप की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय व संगठन महामंत्री सुनील बंसल जिताऊ ऊम्मीदवारों पर चर्चा कर चुके हैं।

खबरों के मुताबिक भाजपा ने जलालपुर सीट जिताने की जिम्मेदारी मंत्री ब्रजेश पाठक और संतोष सिंह को दी है, जबकि अन्य 10 सीटों के लिए एक-एक मंत्री लगाए गए हैं। इनमें डिप्टी सीएम केशव मौर्य को गोविंदनगर (कानपुर), मंत्री आशुतोष टंडन को लखनऊ कैंट, मंत्री श्रीकांत शर्मा को टूंडला, दारा सिंह चौहान को जैदपुर(बाराबंकी), प्रतापगढ़ की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को, रमापति शास्त्री को बलहा (बहराइच), और महेंद्र सिंह को मानिकपुर(चित्रकूट), भूपेंद्र सिंह को गंगोह(सहारनपुर), धुन्नी सिंह को हमीरपुर जिताने के लिए लगाया गया है। रामपुर सीट जीतने के लिए बीजेपी ने उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को जिम्मेदारी दी है, वहीं जलालपुर (अंबेडकरनगर) सीट जीतने के लिए जिम्मेदारी मंत्री ब्रजेश पाठक और संतोष सिंह, दो-दो मंत्रियों को सौंपी गई है।

पार्टी ने ये भी साफ कर दिया है कि उपचुनाव में भाई-भतीजावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। सूत्रों के मुताबिक सांसद बन जाने के बाद पार्टी के कुछ विधायक अपनी सीट से अपने रिश्तेदारों को टिकट दिलाना चाहते हैं, लेकिन पार्टी उनके रिश्तेदारों की जगह संगठन के लिए समर्पित भावना से काम करने वाले जुझारू कार्यकर्ताओं को उतारने के पक्ष में है। पार्टी किसी कमजोर उम्मीदवार को उतारने का खतरा मोल नहीं लेना चाहती।