सीएम योगी की सुरक्षा में बड़ी चूक, 14 गिरफ्तार, एक दरोगा सहित छह सिपाही निलंबित

803
SHARE

लखनऊ विश्वविद्यालय में बुधवार शाम आयोजित हिंदवी स्वराज्य समारोह में शामिल होने आए सीएम आदित्यनाथ योगी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक हो गई। समारोह में धन के दुरुपयोग का विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं का एक गुट सीएम की फ्लीट के सामने कूद गया। इस घटना से मौके पर मौजूद पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के होश उड़ गए। छात्र-छात्राओं ने नारेबाजी करते हुए सीएम को काले झंडे दिखाए।

करीब पांच मिनट तक छात्र-छात्राएं सीएम की फ्लीट घेरे रहीं और पूरा तंत्र कुछ नहीं कर सका। बाद में पुलिस ने लाठियां भांजकर छात्र-छात्राओं को हटाया। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि 14 छात्र-छात्राओं को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए छात्र-छात्राएं समाजवादी छात्र सभा, आईसा, एसएफआई से जुड़े हैं। इस दौरान तीन दफा छात्रों को पुलिस ने दूर खदेड़ा और वे बार बार फ्लीट तक पहुंचते रहे। घटना पर देर रात सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों की क्लास ली। इसके बाद एसएसपी ने एक दरोगा व छह सिपाहियों को निलंबित कर दिया।

घटना शाम करीब साढ़े पांच बजे के आसपास की है। लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदवी स्वराज्य समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने सीएम आदित्यनाथ योगी की फ्लीट गेट नंबर एक पर पहुंची, तभी छात्र-छात्राओं का एक दल काले झंडे लेकर बीच सड़क पर आ गया। इससे पहले कोई कुछ समझ पाता, छात्र-छात्राएं सीएम की फ्लीट के सामने कूद गए। ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया तो अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए।

सीएम को काले झंडे दिखाकर नारेबाजी शुरू हो गई। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व विश्वविद्यालय के शोध छात्र अनिल सिंह मास्टर कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों का पैसा समारोह में खर्च कर रहा है जो उचित नहीं है। यह रकम छात्रों के हित में खर्च की जानी चाहिए। छात्रों ने विवि मेें भ्रष्टाचार और दाखिले में धांधली का मुद्दे के अलावा कानून व्यवस्था और अपराध पर भी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारी सीएम के वाहन की तरफ बढ़े तो सुरक्षाकर्मियों ने घेरा बनकर उन्हें रोक दिया। करीब पांच मिनट तक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों व पुलिस के बीच धींगा-मुश्ती चली। इसके बाद हसनगंज पुलिस ने सख्ती कर उन्हें तितर-बितर किया।

सभी प्रदर्शनकारियों को पुलिस अपने साथ कोतवाली ले गई। हालांकि, देर रात तक पुलिस अधिकारी यह तय नहीं कर सके थे कि प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए। उधर, समाजवादी छात्र सभा के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की सूचना पाकर सपा नेता हसनगंज कोतवाली पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। एहतियातन आसपास के थानों की फोर्स मौके पर बुलवा ली गई।

इंटेलीजेंस ने मंगलवार को अनिल यादव, नितिन राज, प्रवीण पांडेय, पूजा शुक्ला सहित अन्य लोगों के द्वारा काले सीएम को झंडे दिखाने की सूचना दी थी। बुधवार सुबह पुलिस-प्रशासन को फिर से अलर्ट किया गया जिस पर हसनगंज पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, पकड़े गए प्रदर्शनकारियों के साथी काले झंडे लेकर आए गए, जिन्हें मौके से दबोच लिया गया।

स्टूडेंट्स द्वारा काले झंडे दिखाए जाने की घटना के बाद मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ ने मंच से भी इसकी चर्चा की। हालांकि उनका अनुमान था कि स्टूडेंट हिंदवी स्वराज्य समारोह का विरोध कर रहे हैं, जबकि स्टूडेंट समारोह के बजाय खर्च और प्रदेश की व्यवस्था के विरोध में काले झंडे दिखा रहे थे। मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के शब्दों को याद करते हुए कहा कि जो अपना इतिहास नहीं जानते उनका भूगोल बिगड़ जाता है। कुछ स्टूडेंट मतिभ्रष्ट होकर इस तरह का कृत्य कर रहे हैं।

विवि के केवल दर्जन भर स्टूडेंट्स ने मुख्यमंत्री की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को धता बता दिया। यहां तक कि काले झंडे दिखाने के दौरान मुख्यमंत्री की फ्लीट करीब पांच मिनट तक सड़क पर ही खड़ी रही। इसकेे बावजूद विवि प्रशासन, एलआईयू और पुलिस को इसकी खबर नहीं हुई। रोड पर झंडे दिखाते समय रुकी फ्लीट को रवाना करने में भी पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल गए।

पुलिस ने काले झंडे दिखाने वाले स्टूडेंट्स अनिल यादव, महेंद्र यादव, मधुर सिंह, अनंत सिंह, पंकज, अशोक कुमार, दिनेश कुमार, राजेश कुमार, शत्रोहन सिंह, हिमांशु, हर्ष यादव, वैभव मिश्रा, नितिन राना, अपूर्वा और पूजा शुक्ला को देर रात तक थाने में बिठाया गया था। पुलिस मुकदमा दर्ज करने के लिए इन छात्र-छात्राओं के खिलाफ तहरीर का इंतजार कर रही थी।

लविवि प्रवक्ता प्रो.एनकेे पांडेय ने कहा कि स्टूडेंट्स द्वारा काले झंडे दिखाने की घटना का उन्हें पता चला है। इसमें विवि के छात्र शामिल हैं। फिलहाल वे इसके तथ्य जुटा रहे हैं। इसके बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई के बारे में विचार किया जाएगा।

विश्वविद्यालय में छात्रों का पैसा समारोह में खर्च किए जाने को लेकर चार दिन से तनाव चल रहा था। अनिल सिंह मास्टर ने कहा कि वित्त नियंत्रक की आपत्ति के बावजूद समारोह के आयोजन के लिए विवि द्वारा पैसा खर्च किया जाना गलत है। विवि के पास जो बजट आता है उसका उपयोग छात्र हित में किए जाने के बजाय इस तरह के आयोजनों में किया जाना कहीं से भी सही नहीं है। क्रीड़ा परिषद की ओर से होने वाले इस समारोह पर विवाद तभी शुरू हो गया था

जब कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राकेश यादव ने कुलपति को पत्र देकर इस पर अपनी जताई थी। उनका कहना था कि क्रीड़ा परिषद का आयोजन होने की वजह से इसका खर्च भी परिषद को ही वहन करना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं किया जा रहा है। इसके बाद वित्त नियंत्रक ने विवि द्वारा खर्च उठाने पर आपत्ति जताई गई थी। इसकेे स्टूडेंट्स में आक्रोश था।

source-AU