4 देशों में रैनसमवेयर का अटैक, भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट भी शिकार हुआ

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वानाक्राई के बाद एक बार फिर यूक्रेन, रूस और यूरोप में कई दिग्गज कंपनियों पर रैनसमवेयर का बड़ा हमला हुआ है। मंगलवार को रूस और यूक्रेन से शुरू हुए इस हमले ने देखते ही देखते यूरोप के कई देशों और अमेरिका के कई सर्वरों को अपनी चपेट में ले लिया। रूस में जहां सबसे बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट इसकी चपेट में आई वहीं यूक्रेन में सरकारी मंत्रालयों, बिजली कंपनियों और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम बैठ गए।

भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी भी इस साइबर हमले की जद में आ गया। पोर्ट के एक टर्मिनल का संचालन इससे प्रभावित हुआ है। जेएनपीटी में हमले से प्रभावित एपी मोलर-माएस्क गेटवे टर्मिनल इंडिया (जीटीआई) का संचालन करती है। इसकी क्षमता 1.8 मिलियन स्टैंडर्ड कंटेनर यूनिट को संभालने की है। जेएनपीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘हमें सूचना मिली है कि साइबर हमले के कारण सिस्टम डाउन होने से जीटीआई में संचालन थम गया है। वे मैन्युअली काम करने का प्रयास कर रहे हैं।’

उधर, यूक्रेन में सेंट्रल बैंक, सरकारी बिजली वितरक कंपनी यूक्रेनेर्गो, विमान निर्माता कंपनी एंतोनोव और दो डाक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। राजधानी कीव की मेट्रो में पेमेंट कार्ड काम नहीं कर रहे हैं जबकि कई पेट्रोल स्टेशनों को अपना काम-काज रोकना पड़ा है। रूस की रोसनेफ्ट पेट्रोलियम कंपनी भी साइबर हमले की चपेट में आई है। इसके अलावा डेनमार्क की समुद्री यातायात कंपनी माएस्क, ब्रिटेन की दिग्गज विज्ञापन कंपनी डब्ल्यूपीपी और फ्रांसीसी कंपनी सेंट-गॉबेन के सर्वरों पर भी हमला किया गया है। इस हमले के अमेरिका तक पहुंचने की खबरें आ रही हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पिछले महीने हुए वानाक्राई रैंसमवेयर जैसा हमला है। वायरस उन्हीं कमजोरियों का इस्तेमाल कर रहा है जो पिछले महीने वॉनाक्राई रैंसमवेयर ने इस्तेमाल की थीं। सरे यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर वैज्ञानिक ऐलन वुडवर्ड ने कहा कि यह पिछले साल सामने आए रैनसमवेयर के एक हिस्से का ही एक प्रकार हो सकता है। हेलेंस्की स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी एफ-सिक्योर के मुख्य रिसर्च अधिकारी मिक्को हाइपोनेन ने कहा कि एक बार फिर वानाक्राई ने हर ओर दहशत मचा दी है।

source-AU