अमेरिका में कौन बनेगा सरताज?

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अमेरिका आज अपना नया राष्ट्रपति चुनेगा। अधिकांश चुनाव-पूर्व जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने अपनी बढ़त बरकरार रखी है। सभी चुनाव सर्वेक्षणों का औसत बताने वाली एक वेबसाइट के मुताबिक सोमवार को रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप पर उनकी बढ़त 1.8 प्रतिशत थी। मगर अमेरिकी चुनाव प्रणाली ऐसी है, जिसमें मुमकिन है कि राष्ट्रीय स्तर पर अधिक वोट पाने वाला प्रत्याशी हार जाए। राष्ट्रपति को विभिन्न् राज्यों से मतदाता मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) के लिए चुने गए प्रतिनिधि निर्वाचित करते हैं। किसी राज्य में जिस प्रत्याशी को सर्वाधिक वोट मिलें, वहां से उसे इलेक्टोरल कॉलेज के सभी प्रतिनिधि मिल जाते हैं। ऐसे में चुनाव का नतीजा उन कुछ राज्यों से निर्धारित होता है, जहां दोनों प्रमुख दलों में कांटे की टक्कर होती है। फ्लोरिडा, ओहायो, नॉर्थ कैरोलीना, उटाह व न्यू हैम्पशायर ऐसे राज्य हैं, जहां से कोई साफ संकेत नहीं मिले। पेन्सिलवेनिया में भी पहले असमंजस था, किंतु मतदान करीब आते-आते ये राज्य हिलेरी की ओर झुकता दिखा।

तो कुल सूरत है कि ट्रंप कड़ी टक्कर वाले राज्यों को जीत लें, तो वे वैसा ही चमत्कार दिखा सकते हैं, जैसा उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी की होड़ के दौरान दिखाया। ट्रंप पिछले साल जब इस मुकाबले में उतरे, तो उन्हें किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। मगर कंजरवेटिव, दक्षिणपंथी, कट्टर ईसाई समूहों और आर्थिक मंदी से अवसर गंवाने के कारण नाराज तबकों को उन्होंने इतनी मजबूती से गोलबंद किया कि तमाम रिपब्लिकन दिग्गज उनके आगे धराशायी हो गए।

कहा गया है कि ट्रंप ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। इसी की मिसाल है कि कुछ दिन पहले भारत और हिंदुओं से अपना लगाव जाहिर करने वाले ट्रंप ने दो दिन पहले कहा कि भारत और चीन ने अमेरिकी लोगों की नौकरियां चुराई हैं, जिसे वे रोकेंगे। इसके अलावा उन्होंने ऐसी कई बातें कही हैं, जिन्हें कहना पहले अमेरिका के सार्वजनिक जीवन में वर्जित माना जाता था। वैसे सामान्यत: रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों का भारत की तरफ अधिक झुकाव रहा है। संभवत: इसीलिए अमेरिका में रहने वाले तकरीबन 12 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं के बड़े हिस्से का समर्थन ट्रंप को मिलने का अंदाजा है। वैसे विदेश नीति के निर्धारक पहलू राष्ट्रीय हित होते हैं। अत: अमेरिका में भारत से बेहतर संबंध रखने पर आम सहमति है। इसीलिए कहा गया है कि हिलेरी क्लिंटन जीतीं, तब भी दोनों देशों के रिश्ते प्रगाढ़ता की तरफ बढ़ते रहेंगे। क्लिंटन राष्ट्रपति बनीं तो ये उपलब्धि हासिल करने वाली वे पहली महिला होंगी। जाहिर है, दुनियाभर की महिलाएं इसमें अपनी कामयाबी देखेंगी। जनमत सर्वेक्षणों में महिलाओं का उन्हें मिला असामान्य समर्थन इस बात की झलक है। वे जीतीं, तो इस पहलू की संभवत: सबसे खास भूमिका होगी|