अखिलेश यादव को बड़ा झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 जातियों को अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगा दी

8
SHARE

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका दिया है| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के 22 दिसंबर 2016 को जारी उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है जिसके तहत इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल कर उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा देने का आदेश दिया गया था| सरकार के इस निर्णय के खिलाफ डॉ भीमराव अम्बेडकर ग्रंथालय एवं जन कल्याण समिति ने याचिका दाखिल कर नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की थी| आज कोर्ट ने इसी याचिका पर यह फैसला सुनाया है|

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की है| सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोटिफिकेशन में शामिल सभी 17 जातियों को अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगा दी है| कोर्ट ने प्रमुख सचिव समाज कल्याण को आदेश के अनुपालन का आदेश देते हुए उन्हें रिपोर्ट मांगी है|

याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत किसी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का अधिकार केन्द्र सरकार को है| राज्य सरकार को ऐसा अधिकार ही नहीं है| इसलिए राज्य सरकार के शासनादेश 22 दिसम्बर 2016 व 31 दिसम्बर 2016 की अधिसूचना को रद्द किया जाए तथा 17 जातियों को पिछड़े वर्ग में वापस किया जाए|

जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश में सभी विपक्षी दलों ने राज्य सरकार के इस कदम का विरोध किया था| साथ ही कहा था कि चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम चला है| कई लोगों का आरोप था कि राज्य सरकार सीधे मौजूदा अनुसूचित जातियों के हितों के खिलाफ यह काम कर रही थी|