हवा, पानी के साथ ज़मीन के अंदर तक पहुँच चूका है प्रदूषण

95
SHARE

सीएजी रिपोर्ट में हवा, पानी ही नहीं भूगर्भ जल तक प्रदूषण का जहर पहुंच चुका है। प्रदेश की नदियां, जलाशय और शहरों की हवा मानक से अधिक प्रदूषित है। अवैध ढंग से डंप किए जाने वाले ठोस व संक्रमित कचरे से भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो रहा है। सीएजी रिपोर्ट में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड के पास औद्योगिक इकाइयों की पूरी सूची नहीं है। ऐसे में उसके लिए इकाइयों से होने वाले प्रदूषण का स्तर तय करना संभव नहीं। यही नहीं, बोर्ड हवा की गुणवत्ता की जांच सिर्फ तीन मानकों पर करता है जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 12 मानक तय हैं।

रिपोर्ट के अनुसार गंगा और गोमती सहित प्रदेश की सभी 12 प्रमुख नदियों और छह जलाशयों का पानी प्रदूषित है। आसपास के शहरों और कस्बों के सीवर और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी बिना शोधन के इन जलस्रोतों में जा रहा है। इसके लिए जो नगर निकाय और इकाइयां दोषी हैं, उनके खिलाफ बोर्ड उचित कदम उठाने में विफल रहा।

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के प्रमुख शहरों (इलाहाबाद, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ,नोएडा और वाराणसी) में हवा के प्रदूषण का स्तर मानक से अधिक है। बोर्ड अलीगढ़, सोनभद्र और रायबरेली के थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख की निगरानी और इसका सौ फीसद उपयोग करने में विफल रहा। रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में आबादी का घनत्व लखनऊ से अधिक है पर वहां गंगा लखनऊ में गोमती की तुलना में कम प्रदूषित है। वाहनों की संख्या दोगुनी होने के नाते लखनऊ में वाराणसी की तुलना में वायु प्रदूषण भी अधिक है।

शहरों से निकलने वाले ठोस कचरे और अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित कचरे के प्रबंधन का हाल तो और भी बुरा है। नगरीय निकायों से रोज करीब 15403 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। इनमें से सिर्फ 1521 मीट्रिक टन का ही शोधन हो पाता है। प्रदेश के 620 निकायों में ठोस कचरे के शोधन की सुविधा ही नहीं है। यही हाल अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित कचरे का भी है। प्रदेश में पांच जगहों पर कई वर्षों से अवैध ढंग से कचरे का निस्तारण हो रहा है। इनमें से चार कानपुर और एक देवा रोड बाराबंकी में है। इस कचरे से आसपास का भूगर्भ जल और हवा प्रदूषित हो रही है।

source-DJ