गठबंधन टूट गया- मायावती को अखिलेश यादव ने दिया जवाब

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बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के फैसले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी जवाब दिया है और इसी के साथ अब यह भी साफ हो गया है कि भले ही औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है लेकिन गठबंधन अब टूट गया है। मायावती ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी राज्य में 11 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में अकेले लड़ेगी तो अखिलेश यादव ने भी कहा कि उनकी पार्टी भी अकेले ही लड़ेगी।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा उपचुनावों में अकेले लड़ेगी क्योंकि लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन से कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ‘ सपा के साथ यादव वोट भी नहीं टिका रहा। अगर सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों के साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में सफल रहे तो साथ चलने की सोचेंगे। फिलहाल हमने उपचुनावों में अकेले लड़ने का फैसला किया है।’

मायावती ने इसके साथ ही यह भी कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव से उनके रिश्ते कभी खत्म नहीं होने वाले हैं। मायावती ने कहा कि अखिलेश और डिंपल ने उनका पूरा सम्मान किया और बदले में उन्होंने भी ऐसा ही किया। बहरहाल उनकी इन बातों से यही निष्कर्ष निकलता है कि मायावती फिलहाल गठबंधन को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं, वह विधानसभा चुनाव के वक्त हालात देख कर तय करेंगी कि सपा के साथ गठबंधन में जाना है या नहीं।

मायावती ने पूरी शालीनता के साथ समाजवादी पार्टी को खरा-खरा सुनाया तो अखिलेश यादव के साथ भी मजबूरी थी कि वह इसका ऐसा ही जवाब दें। उन्होंने कहा कि गठबंधन टूटा है या जो गठबंधन पर कहा गया है उस पर सोच समझ कर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके रास्ते अलग हैं तो उसका भी स्वागत, बधाई। उन्होंने भी कहा कि बसपा अकेले लड़ेगी तो समाजवादी पार्टी भी अकेले लड़ेगी, पार्टी उपचुनाव के लिए तैयार है।

बताते चलें कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से नौ भाजपा विधायकों और सपा, बसपा के एक-एक विधायक के सांसद बनने से 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। यह सीटें गंगोह (सहारनपुर), टूंडला, गोविंदनगर (कानपुर), लखनऊ कैंट, प्रतापगढ़, मानिकपुर चित्रकूट, रामपुर, जैदपुर(सुरक्षित) (बाराबंकी), बलहा(सुरक्षित), बहराइच, इगलास (अलीगढ़) और जलालपुर (अंबेडकरनगर) हैं। बसपा अब तक उपचुनावों से दूर रहा करती है लेकिन लोकसभा चुनावों में 10 सीटें मिल जाने से पार्टी का उत्साह बढ़ा है और वह एक साथ 11 सीटों से मुंह नहीं मोड़ पा रही है।

अब संभावना है कि यूपी में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल मिल कर यह उपचुनाव लड़ें। बहरहाल सपा-बसपा गठबंधन टूटने पर भाजपा खेमे में काफी खुशी दिखाई दे रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह पहले से ही तय था कि नतीजों के बाद दोनों दल ज्यादा दिन साथ नहीं रह पाएंगे, क्योंकि यह गठबंधन सिर्फ स्वार्थों पर आधारित था। खुद पएम मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान ऐसी ही बात कही थी और यह सच भी हुआ।