अखिलेश यादव, बसपा से दोस्ती और प्रमोशन में आरक्षण के बीच बुरे फंसे

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प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अजीब उलझन में हैं। यह उलझन मायावती की बसपा के साथ संभावित गठबंधन और अपने बेस वोट बैंक को कैसे बचाए रखें इसे लेकर है क्योंकि अखिलेश यादव का जो कोर वोटर है वह प्रमोशन में आरक्षण का विरोधी रहा है और अखिलेश जिस पार्टी से गठबंधन करना चाहते हैं वह इसकी समर्थक है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रमोशन में एससी-एसटी को आरक्षण लागू करने की मांग कर दी क्योंकि अदालत ने इस फैसले को राज्यों पर छोड़ दिया था। अखिलेश यादव अब तक इस पर अपनी राय साफ नहीं कर सके हैं, अलबत्ता खबरें हैं कि उन्होंने अपने सभी प्रवक्ताओं और पैनलिस्ट्स को ये हिदायत जरूर दे ही है कि वो बयान देते समय इस बात का ध्यान रखें कि कहीं कोई गलत संदेश न जाए।

अखिलेश यादव की उहोपोह यह है कि वह मायावती को नाराज करने का खतरा मोल नहीं ले सकते और पार्टी का आधार वोटर भी बना रहे इसे कैसे संभव किया जाए। खबरे हैं कि इसीलिए पार्टी के प्रवक्ताओं, नेताओं को 11 सूत्रीय एक गाइडलाइन दी गई है जिसना निचोड़ यह है कि वह साफ जवाब देने की बजाय गोलमोल जवाब देंगे और जवाब में विरोधियों पर आक्रामक रहेंगे।