यूपी बोर्ड अब इंटरमीडिएट की परीक्षा में एक ही पेपर करने की तैयारी में

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माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड में अगले सत्र से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के पाठ्यक्रम में बदलाव प्रस्तावित है। यूपी बोर्ड की इंटर की परीक्षा में हर विषय के दो प्रश्नपत्रों को एक करने की प्रक्रिया सोमवार से यूपी बोर्ड में शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इसी माह यह पूरी हो जाएगी। शासन की मुहर लगने के बाद 2018 से उसे लागू किया जाएगा।

प्रदेश सरकार इस बदलाव के पहले परीक्षार्थियों को सीबीएसई के पैटर्न पर आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि परीक्षा देने में उन्हें कोई दिक्कत न हो। ज्ञात हो कि सीबीएसई में एनसीईआरटी यानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद का पाठ्यक्रम लागू है और वहां हाईस्कूल व इंटर में हर विषय के एक-एक प्रश्नपत्र की परीक्षा होती है।

यूपी बोर्ड हाईस्कूल में हर विषय में एक प्रश्नपत्र का इम्तिहान हो रहा है, लेकिन इंटर में दो-दो प्रश्नपत्र होते हैं। इसे घटाकर एक-एक प्रश्नपत्र किये जाने की तैयारी है। बोर्ड ने भी कक्षा 11 व 12 का पाठ्यक्रम जल्द ही अलग-अलग किया है। शासन का निर्देश है कि भले ही नया पाठ्यक्रम अगले सत्र से लागू हो, लेकिन मौजूदा पाठ्यक्रम के अनुसार इंटर में परीक्षा एक-एक प्रश्नपत्र से ली जाये। इसी को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम समिति के 33 विषय विशेषज्ञों की बैठक बुलाई गई है।

बोर्ड मुख्यालय पर सोमवार से शुरू हुई बैठक में कंप्यूटर व मानव विज्ञान के साथ चर्चा शुरू हुई है, इसमें एक सूत्रीय कार्य प्रश्नपत्र का एकीकरण ही है। यह बैठकें 14 जुलाई तक नियमित होंगी। उसके बाद पाठ्यचर्या समिति की बैठक एक प्रश्नपत्र पर मुहर लगाएगी, उसके तुरंत बाद यूपी बोर्ड इस बदलाव को बैठक में पारित करके शासन को भेजेगा और शासन की मुहर लगने के बाद 2018 की बोर्ड परीक्षा में वह लागू हो जाएगा। इस कदम से बोर्ड को समय के साथ ही परीक्षा परिणाम तैयार करने में सहूलियत रहेगी और उत्तरपुस्तिकाओं, प्रश्नपत्र आदि में स्टेशनरी की भी बचत होगी।

सूबे की सरकार अगले सत्र से नया पाठ्यक्रम लागू करने को सहमत है, लेकिन यूपी बोर्ड की बुलाई गई बैठक में नये पाठ्यक्रम पर चर्चा के बजाय पूरा ध्यान प्रश्नपत्रों की संख्या घटाने पर ही केंद्रित किया गया है, क्योंकि नया पाठ्यक्रम लागू होने के बाद उसकी परीक्षाएं 2020 से होंगी और उसमें अभी काफी समय है। प्रश्नपत्र घटने से परीक्षा की अवधि कम होगी और बोर्ड प्रशासन आसानी से अप्रैल से नया सत्र शुरू कर सकता है।