समझाने से नहीं, बहकाने से वोट मिलता है- अखिलेश

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हार के बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, ”जो समाजवादी पार्टी के साथ खड़े रहे मैं उनका धन्यवाद देता हूं। मुझे लगता है कि आने वाले समय में जो सरकार आएगी, वो समाजवादी सरकार से बेहतर काम करेगी। जनता के लिए आने वाली सरकार ज्यादा काम करेगी। मैं जनता को बधाई देता हूं कि उन्होंने जो फैसला लिया है, लोकतंत्र में ऐसा ही फैसला लिया जाता है।

मायावती जी ने अगर ईवीएम पर सवाल उठाया है, तो ये सरकार को सोचना चाहिए। उसे जांच करानी चाहिए। कांग्रेस के गठबंधन के साथ दो युवा नेता सामने आए और गठबंधन आगे भी जारी रहेगा। सरकार बनने से सभी किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा, इससे ज्यादा खुशी की बात क्या होगी।”
– ”पहली कैबिनेट के फैसले का इंतजार कीजिए, अगर यूपी के किसानों का कर्ज माफ हो गया तो देश के किसानों का भी कर्ज माफ हो सकता है।”
– ”लोग दरवाजा खुलवाकर बोल रहे थे कि नोटबंदी का पैसा गरीबों को मिलेगा, हम देखना चाहते हैं कि नोटबंदी का पैसा गरीबों तक कितना पहुंचता है।”
– ”हमारी साइकिल ट्यूबलेस साइकिल थी और आगे भी रहेगी। कांग्रेस हमारे साथ रहेगी, पता नहीं है कि दो सीट वाली साइकिल भी आती है।”
– अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश ने कहा कि समझाने से नहीं, बहकाने से वोट मिलता है।

उऩ्होंने कहा कि यूपी का सीएम मैं नहीं बनूंगा, लेकिन पहली बैठक में मध्यम वर्ग के किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पार्टी मुख्यालय आएंगे और उनका स्वागत किया जाएगा।

दूसरी ओर मौजूदा विधानसभा चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन ने विरोधियों को हैरत में डाल दिया है। सफलता का आलम ऐसा है‌ कि यूपी और उत्तराखड में तो मोदी लहर राम लहर से भी बड़ी होती दिख रही है। इतनी बड़ी सफलता की उम्‍मीद तो खुद भाजपा नेताओं ने भी नहीं की होगी, लेकिन राजनीति में कब क्या चमत्कार हो जाए कोई नहीं कह सकता।

उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन 325 सीटों को पार करता दिख रहा है तो उत्तराखंड में भी पार्टी को दो तिहाई सीटें मिलती दिख रही हैं। गोवा में जहां पार्टी सत्ता में वापसी की ओर है तो उत्तर पूर्व के राज्य मणिपुर में कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी है। हालांकि पंजाब के नतीजे पार्टी के मनमुताबिक नहीं रहे, लेकिन ये पार्टी के लिए बड़ी टेंशन भी नहीं है, क्योंकि यहां वह कभी भी मुख्य मुकाबले में नहीं रही।

खास बात ये है कि इस शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा को नोटबंदी के जिन्न से पीछा छुड़ाने में भी मदद मिलेगी। वहीं विपक्षी दलों के लिए ये नतीजे चिंतन वाले साबित हुए हैं। यूपी की जनता ने जहां अखिलेश राहुल के साथ को पूरी तरह नकार दिया है, वहीं बसपा के तो वजूद पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

गोवा में भाजपा और कांग्रेस के बीच कशमकश जारी है तो उत्तर पूर्व के राज्य मणिपुर में भाजपा ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। खास बात ये है कि इन चुनावों के परिणाम देश का राजनीतिक परिदृश्य बदलने वाले भी साबित होंगे, जिसके बाद भाजपा राज्यसभा में भी मजबूत होगी और राज्यों में भी। जिससे उसे जीएसटी और अन्य बड़े फैसले लागू करवाने में भी आसानी होगी।