48 दिन तक मौत से लड़ने वाली एसिड अटैक पीड़ित गुलिस्ता हरी ज़िन्दगी की जंग

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एसिड अटैक विक्टिम गुलिस्ता (19) ने रविवार को दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वो 48 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही थी। मृतका के परिजन रविवार दोपहर उसकी डेडबॉडी लेकर गाजियाबाद स्थित अपने घर पहुंचे, जहां उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
गुलिस्ता के भाई जाहिद ने बताया वो सुबह तक ठीक थी। मैं मां के साथ उससे मिलने आईसीयू में गया था। सबसे पहले उसने कहा कि वो जल्दी घर पहुंचकर पूरी फैमिली से मिलना चाहती है। उसका आखिरी सवाल था मां, दो फरार हो चुके मेरे गुनहगार पकड़े गए क्या? हमने कहा कि अभी गिरफ्तार नहीं हुए तो वो चुप हो गई। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।
बीते 20 मार्च की रात को शाहरुख नाम के सिरफिरे आशिक ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर गुलिस्ता पर तेजाब डाला था। अटैक के वक्त वो आंगन में सो रही थी। परिजनों के मुताबिक, शाहरुख मृतका से प्यार करने का दावा करता था और उसे काफी दिनों से परेशान कर रहा था।
 
जाहिद ने बताया बीते 1 मार्च को हमने गुलिस्ता की खुर्जा निवासी दानिश से सगाई करवाई थी और जल्द निकाह होना था, तारीख तय नहीं थी। मंगेतर दानिश ने बताया मुझे अंदाजा नहीं था कि मेरी जिंदगी इस कदर बदल जाएगी। वो खुशमिजाज लड़की थी। मैं उसे लगातार निकाह करने का भरोसा दिलाता रहा। उसके अंतिम पलों में भी मैं हॉस्पिटल में मौजूद था।
बीते 5 अप्रैल को एसिड अटैक का मुख्य आरोपी शाहरुख गुलिस्ता से मिलने सफदरजंग हॉस्पिटल पहुंचा था। वहीं से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। अटैक में उसके साथी रहे 2 अन्य आरोपी अभी फरार हैं। परिवार ने आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है।
मृतका के परिजन शासन और प्रशासन के रवैये से नाराज हैं। आरोप है कि घटना के बाद सिर्फ एक बार एडीएम सिटी उनके घर आई थीं। स्थानीय नेता एक बार भी उनसे मिलने नहीं पहुंचे। गुलिस्ता के पिता ने बताया प्रशासन की तरफ से हमें लक्ष्मीबाई योजना के तहत 5 लाख रुपए तो मिले, लेकिन बेटी का हाल जानने कोई अधिकारी या मंत्री नहीं आया। मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाले 1 लाख रुपए भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए। हमें पैसे से ज्यादा सरकार-प्रशासन के सहयोग की जरूरत थी।
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