रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान से 21 गुना ज्यादा जहरीली भारत की हवा, मेरठ एनसीआर रिस्क जोन में

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सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट की ताजी रिपोर्ट के मुताबिक पीएम-2.5 एवं ओजोन गैसों की वजह से भारत में सर्वाधिक मौतें होती हैं। मेरठ समेत एनसीआर परिक्षेत्र सर्वाधिक रिस्क जोन में है। भारत में बांग्लादेश से 13, और पाकिस्तान से 21 गुना ज्यादा जहरीली हवा बहती है।

सेंटर फार साइंस एंड इन्वायरमेंट ने हाल में ग्लोबल बर्डेन आफ डिजीज पर शोधपत्र जारी कर बताया कि 1990 से भारत में पीएम-2.5 से 48 फीसद, जबकि ओजोन गैसों से होने वाली मौतों में 148 फीसद का इजाफा हुआ है। एनसीआर-मेरठ में वाहनों, चिमनियों एवं फैक्ट्रियों से निकलने वाली विषाक्त कणों का लोड सबसे ज्यादा है। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, फरीदाबाद, अमरोहा समेत तमाम शहरों में सूक्ष्म कणों का घनत्व ज्यादा है। ओजोन गैसों में नाइट्रस आक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, एवं वोल्टाइल आर्गेनिक कंपाउंड की बढ़ती मात्र से मौतों का ग्राफ तेजी से बढ़ा। ग्लोबन बर्डेन आफ डिसीज में मौत के 79 रिस्क फैक्टर माने गए हैं, जिसमें वायु प्रदूषण चौथे नंबर पर माना गया है।

ये है सेहत को खतरा: विषाक्त कणों एवं गैसों से सीओपीडी, दमा, लंग कैंसर, रक्त कैंसर, भूलने की बीमारी एवं जेनेटिक बीमारियां भी हो रही हैं। नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि एनसीआर में स्कूली बच्चों में कैंसर का खतरा सर्वाधिक है। हर तीसरे बच्चे पर अस्थमा का खतरा है। सल्फर, नाइट्रोजन एवं मोनोआक्साइड से फेफड़ों में जख्म बन रहा। वीओसी कंपाउंड में बेंजीन सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इंस्टीटयूट आफ हेल्थ मैटिक्स एंड इवैल्युएशन की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर में रिस्क फैक्टर कई गुना बढ़ गया, जबकि चीन, श्रीलंका एवं बांग्लादेश जैसे देशों ने कुछ हद तक नियंत्रण किया है।

77 फीसद पर इसका असर:

भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहर गंभीर है। देश में पर्यावरण संबंधी गतिविधियों पर नजर रखने वाली शीर्ष संस्था ‘सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी इलाकों में 77 फीसद से ज्यादा लोग वायु प्रदूषण से प्रभावित हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 66 करोड़ लोग सांस के जरिए शरीर के भीतर मानक वायु नहीं ले पाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मानकों के मुताबिक, भारत में करीब 99.5 फीसद लोग वायु प्रदूषण के लिहाज से बेहद खराब दशा में हैं।