मथुरा में होली में अबीर की अंधियारी छायी

71
SHARE

भगवान कृष्ण की आराध्या के आंगन मै आनंद की हर अभिव्यक्ति अदनी लगै। याकू तौ बस अनुभूत कियौ जा सकै। राधा के फाग मै रसिकन कौ तन-मन भीज उठौ है।

किशोरी सबपै अबीर गुलाल बरसाय रही है। चहुं ओर ते लड़ुअन की बौछार है रही है। रसिकन कौ रेला झोली फैलाए ठाड़ौ है। जाकी झोली भरै, बाकौ चेहरा खिल उठै। नंदगाम कौ पाड़ौ ठुमक रह्यौ है। मंदिर मै अबीर गुलाल के बदरा उमड़ घुमड़ रहे हैं। लाल गुलाल ते अवनि अंबर लाल है गए हैं और रसिक लालमलाल। अबीर की ऐसी अंधियारी छाई है जामै कोउ नजर नाय आवै। अटा अटारी महल चौबरिया रोम-रोम हरसाए, ढोल मजीरा ढप सुचंग मिलि खनके सुरनि मिलाए, फैटनि भरि भरि रंग गुलाल सौं बदरा लाल उड़ाए… काउ रसिक कौ जे पद लाडि़ली मंदिर मै जीवंत है उठौ है।
श्रीजी मंदिर में कल लड्डू होरी का विहंगम दृश्य था। राधा के द्वार पर रसिकों का मेला उमड़ा था। सबको पट खुलने की प्रतीक्षा थी। चहुं ओर राधे-राधे हो रही थी। कल शाम 4:30 बजे पट खुलते ही रस रासेश्वरी संग होरी खेलने को रसिक दौड़ पड़े। राधे के जयघोष के संग रेला मंदिर में पहुंचा और श्यामा को गुलाल अर्पित किया। कुछ ही क्षणों में समाज भी जुड़ गई|
धोती-बगलबंदी पहने नंदगांव का पाड़ा फाग की स्वीकृति लेकर मंदिर में पहुंचा। गोस्वामियों ने उसका अबीर- गुलाल और लड्डुओं से स्वागत किया। ढप, झांझ, मंजीरा के संग स्वर गूंज उठे, नंदगाम कौ पाड़े ब्रज बरसाने आयौ…।
हुलसता विहंसता पाड़ा ठुमक-ठुमक कर नाचने लगा और लड्डू लुटाने लगा। रसिक भी रसावेश में झूमने लगे। चहुं ओर पुलकित, प्रफुल्लित, प्रमुदित चेहरे थे। देखते-देखते हर ओर से लड्डू बरसने लगे। राधा रानी के इस प्रसाद को पाने के लिए भक्त आतुर थे। हर कष्ट इस सुख के सामने छोटा लग रहा था। मंदिर भक्तों से अटा था। पांव रखने की जगह नहीं थी। भीड़ एक दूसरे को आगे बढ़ा रही थी|