एनएफएसए सूची में 73 हजार फर्जी आधार मिले

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खाद्य सुरक्षा योजना के राशनकार्ड में आधार लगाने की अनिवार्यता का उचित दर विक्रेताओं ने अजब ही तोड़ निकाला है। अलग-अलग परिवारों के कार्ड को मान्य बनाने के लिए एक ही आधार से लिंक करा दिया गया। सूची को आॅनलाइन किया गया और आधार की जांच पड़ताल हुई तो 73 हजार फर्जी प्रति लगाने का कारनामा सामने आया है।

इतने बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ के प्रकाश में आने पर खाद्य अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। सच सामने लाने के लिए इन कार्डों की जांच शुरू करा दी गई है। बताते हैं कि पूर्व में बने फर्जी कार्डों को वैध बनाने के लिए सरकारी दुकानदारों ने यह हथकंडा अपनाया है। जिले के उचित दर विक्रेताओं ने हजारों की तादात में फर्जी राशन कार्ड बना रखे हैं। इन्हीं के जरिए हर महीने आवंटित होने वाले करोड़ों के सरकारी राशन को दुकानदार हजम कर जाते हैं।

सब्सिडी का यह गेहूं और चावल चोरी के रास्ते से बाजार में पहुंच जाता है। दुकारदार की जेब में रकम आ जाती है, जिससे स्थानीय आपूर्ति अफसर भी लाभान्वित होते हैं। गरीबी रेखा और इससे नीचे के परिवारों के नाम पर जारी कराए गए इन फर्जी कार्डों का अस्तित्व बनाए रखने के लिए आधार कार्ड का प्रबंध करने की गुपचुप ढंग से तैयारी हुई।

आधार की जो प्रतियां मिलीं, हड़बड़ी में एक-एक आधार की छायाप्रति से 10-10 राशनकार्ड लिंक करा दिए गए। आनलाइन स्केनिंग में 73 हजार डुप्लीकेट प्रतियों के मिलने की पुष्टि पर अफसर चौंक पड़े। जांच पड़ताल शुरू कराई गई और फर्जी प्रति लगने वाले कार्ड की अलग सूची तैयार करने का निर्देश उच्चाधिकारियों ने दिया है।

शासन ने उन्हीं राशन कार्डों को मान्यता देने का निर्णय लिया है, जिनसे आधार कार्ड लिंक किया जाएगा। साढ़े तीन लाख से अधिक पात्र गृहस्थी और 80 हजार से ज्यादा अंत्योदय कार्ड से जुड़ी योजना के लिए यह अनिवार्यता दी गई है। बाकायदा शासनादेश जारी किया गया। कहा गया कि जो पात्रों की सूची आधार से लिंक किए बना ही खाद्य आयुक्त को भेजी जाए। इससे इतर कार्डों को अमान्य कर दिया जाएगा।