कानपुर IIT के 60% स्टूडेंट्स को इंग्ल‍िश नहीं आती- IIT कानपुर के प्रोफेसर

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IIT, कानपुर के मैकेनिकल विभाग के प्रोफेसर भास्कर दास गुप्ता ने ऑनलाइन इंग्लि‍श प्रोफिसिएन्सी प्रोग्राम की शुरुआत की है। इससे अब तक 20 हजार से ज्यादा छात्र जुड़ चुके हैं। प्रोफेसर ने बताया IIT में पढ़ने वाले करीब 60 फीसदी छात्रों की इंग्ल‍िश बेहद खराब है। इसके बिना किसी भी छात्र का ग्रोथ नहीं हो सकता, अच्छी जॉब नहीं लग सकती। इसलिए इस प्रोग्राम की शुरुआत की है।

भास्कर दास गुप्ता ने कहा पिछले 20 साल से IIT में बच्चों को पढ़ा रहा हूं, लेकिन यहां करीब 60 फीसदी छात्रों की इंग्ल‍िश बेहद खराब है। 30 फीसदी छात्र औसत हैं। सिर्फ 10 फीसदी छात्र का ही अंग्रेजी पर फुल कमांड है। क्लास में आने वाले छात्रों में कई ऐसे हैं, जिन्हें इंग्ल‍िश समझ ही नहीं आती। सबसे ज्यादा खराब हालत नए सेशन में आने वाले छात्रों की होती है। छात्रों की इस समस्या को देखते हुए साल 2014 में ऑनलाइन इंग्लिश प्रोफिसिएंसी प्रोग्राम की शुरुआत की।

इस प्रोग्राम में 15 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी छात्र, बिजनेसमैन, ऑफिस में काम करने वाला, घरेलू महिलाएं, जॉब करने वाली महिलाएं अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकती हैं। कोर्स की अवध‍ि सिर्फ 3 महीने की है। अगर कोई इसे और आगे बढ़ाना चाहता है, तो उसके भी प्रावधान है। इसमें इंग्ल‍िश में लिखने का तरीका, ग्रामर को याद रखने के टिप्स, उन शब्दों का बैंक, जो रोजना हम अपने जीवन में इस्तेमाल करते हैं। एडमिशन लेने वालों को समय-समय पर प्रैक्टिस सेट दिया जाता है। हर महीने एक ऑनलइन टेस्ट भी कराया जाता है, लेकिन फाइनल टेस्ट IIT, कानपुर में कराया जाता है, जो ओपन टेस्ट होता है। इसमें कोई भी भाग ले सकता है। टेस्ट पास करने वालों को सर्टिफिकेट दिया जाता है। प्रोग्राम में एडमिशन लेने से पहले एक टेस्ट देना पड़ता है, उसे पास करने के बाद ही तय किया जाता है कि किसे किस ग्रेड में रखा जाएगा।

प्रोफेसर के मुताबिक, साल 2014 से 2017 तक 20 हजार से ज्यादा लोग इस कोर्स को कर चुके हैं। हर साल कोर्स में दाखिला लेने वालो की संख्या बढाती जा रही है। यूपी के अलावा दिल्ली, बिहार, जम्मू और एमपी राज्यों से भी लोग इस कोर्स से जुड़ रहे हैं। इसकी शुरुआत 2 लोग मिलकर किए थे, आज टीम में करीब 20 लोग जुड़ गए है, ये सभी छात्र हैं। टीम मेंबर का काम प्रैक्टिस शीट को तैयार करना। रजिस्ट्रेशन देखना, ऑनलाइन एग्जाम कंडक्ट करवाना। प्रोग्राम में जॉब करने वाले छात्राें का भी टेस्ट लिया जाता है, उसके बाद ही उन्हें काम पर रखा जाता है।

source-DB