क्या लीक हुई थी जानकारी? नोटबंदी से पहले 3 लाख करोड़ जमा हुए

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पीएम मोदी ने आठ नवंबर की देरशाम को नोटबंदी का फैसला सुनाया। मगर इससे पहले 16 सितंबर से 30 सितंबर के बीच बैंकों में तीन लाख करोड़ रुपये की बड़ी रकम जमा हुई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या नोटबंदी लागू किए जाने की जानकारी लीक हो गई थी।

अहम बात यह है कि 16 सितंबर वो तारीख थी जिस दिन आरबीआई ने 100 फीसदी सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) लागू करने का फैसला किया था। आरबीआई ने कहा था कि 100 फीसदी सीआरआर इसलिए तय किया जा रहा है क्योंकि बैंकों में कैश पहले के मुकाबले बढ़ सकता है। लिहाजा, जानकारों का कहना है कि आरबीआई व बैंकिंग सेक्टर के एक बड़े तबके को मालूम था कि 16 सितंबर से बैंकों में कैश बढ़ने लगेगा है। यानी जानकारी आरबीआई को भी थी कि अधिक कैश जमा होने लगेगा। उधर, वित्त मंत्री ने उन खबरों को खारिज किया जिनमें कहा गया कि नोटबंदी लागू होने की जानकारी लीक हुई थी। इस वजह से ये रकम जमा हुई।
क्या कर्मचारियों का एरियर था
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि विभिन्न बैंकों में जमा हुई राशि का कारण सातवें वेतन आयोग का लागू होना भी है। दरअसल, 31 अगस्त से 15 सितंबर के बीच सातवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों के लिए 45 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। सितंबर के पहले हफ्ते में यह राशि कर्मचारियों के खातों में डाली गई। वहीं एसबीआई बैंक की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य कहती हैं कि वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत पेंशन का पैसा भी बैंकों में आया है। वो कहती हैं कि संभावना है कि तीन करोड़ रुपये की राशि में इसका भी हिस्सा है।
2011 में जमा हुए थी बड़ी रकम
15 दिनों में एक लाख करोड़ से ज्यादा जमा होने वाली रकम आखिरी बार आठ अप्रैल 2011 को जमा हुई थी। इस तिथि से 15 दिनों तक 1.79 लाख करोड़ रुपये जमा हुए थे। उससे पहले साल 2002 में मई माह के 15 दिनों में 44,700 करोड़ रुपये जमा हुए थे। वहीं, एसबीआई बैंक के सीईए सौम्या कांती घोष ने मार्च में नोटंबदी को लेकर अंदेशा जताया था। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने तमाम बैंकों को एटीएम मशीनों में 100 रुपये के अधिक नोट डालने के लिए कहा है। बहरहाल, ऐसे में साफ है कि आरबीआई समेत बैंकिंग सेक्टर के एक बड़े तबके को नोटबंदी लागू किए जाने की जानकारी थी।