पुलिसिया लापरवाही पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिखाई सख्ती, दो एसपी सस्पेंड

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उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने में लगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो पुलिस अधीक्षकों पर सख्त एक्शन लिया है। राज्य में बढ़ते अपराधों पर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद सीएम योगी ने संभल और प्रतापगढ़ के एसपी को सस्पेंड कर दिया है।

राज्य गृह विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ के एसपी संतोष कुमार सिंह और संभल के एसपी आरएम भारद्वाज को निलंबित कर दिया है, इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों पर अपने काम में लापरवाही दिखाने का आरोप है। अब प्रतापगढ़ में देवरंजन वर्मा को भेजा गया है और संभल में यमुना प्रसाद को पुलिस कप्तान बनाया गया है।

बताते चलें कि इन दोनों जिलों में महिलाओं के साथ अपराध की संगीन वारदातें सामने आई थीं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। प्रतापगढ़ में बाघराय थाना क्षेत्र के काशीपुर की एक 16 साल की लड़की को दबंगों ने अगवाकर उसकी हत्या कर दी थी। इसे खुदकुशी का मामला दिखाने के लिए उसके शव को पेड़ से लटका दिया गया था। इस मामले में लापरवाही बरतने पर स्थानीय एसओ को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था और अब एसपी पर गाज गिरी है।

उधर संभल में दबंगों ने एक महिला के साथ पहले तो गैंगरेप किया फिर उसे जिंदा जला दिया था। पीड़ित ने गैंगरेप के बाद ही डायल 100 पर पुलिस को फोन किया था लेकिन आरोप है कि डायल 100 टीम ने फोन नहीं उठाया। इस पर पीड़िता ने अपने भाई को फोन करके मदद मांगी। महिला के आवाज उठाने पर दबगों ने उसके घर में घुस कर उसे जिंदा जला दिया। पुलिस इस मामसे में गैंगरेप से इनकार कर रही थी हालांकि महिला के मोबाइल की ऑडियो रिकार्डिंग से उसके साथ गैंगरेप की बात सामने आई, इसके बाद ही एसपी आरएम भारद्वाज पर कार्रवाई की गई।

बताते चलें कि कुछ दिनों पहले ही जेल में बंद मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद राज्य में बढ़ते अपराधों पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा था कि आज यूपी में न तो क़ानून बचा है न व्यवस्था, हर तरफ़ दहशत का वातावरण है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वो जेल तक में हत्याएं कर रहे हैं। ये सरकार की विफलता है. प्रदेश की जनता इस भय के माहौल में बहुत डरी-सहमी है. प्रदेश ने ऐसा कुशासन व अराजकता का दौर पहले कभी नहीं देखा।

विपक्ष की तरफ से कानून-व्यवस्था पर लगातार सवाल किए जाने से सरकार के सामने जवाबदेही खड़ी हो गई थी। बीजेपी के लिए कानून-व्यवस्था का मसला चुनावों में सबसे बड़ा मसला रहा है और जब सरकार खुद ही इसी मसले पर घिरने लगी है तो सख्त कदम उठाया जाना स्वाभाविक ही था। योगी सरकार ने बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई कर संदेश देने की कोशिश की है कि लापरवाही हुई तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा।