UPSIDC में 1100 करोड़ के टेंडर में घोटाला, जांच के आदेश

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उत्तर प्रदेश के उद्योगों को खस्ताहाल से उबारने वाली संस्था उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआइडीसी) में ही बड़े घोटाले हो रहे हैं। यहां एमडी रहे अमित कुमार घोष (आइएएस) पर 1100 करोड़ के टेंडर में बड़ा घपला करने का आरोप है।

अमित कुमार घोष घोष पर कमीशन के माध्यम से करीब तीन सौ करोड़ रुपए कमाने के आरोप की जांच का आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्य संभालने के बाद ही हटाए गए अमित कुमार घोष फिलहाल प्रतीक्षा सूची में हैं।

यूपीएसआइडीसी में इस बड़े घोटाले के आरोप पर मुख्यमंत्री कार्यालय बेहद गंभीर है। विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ.आदर्श सिंह ने इस बाबत महानिदेशक सर्तकता को मामले की गंभीरता देखते हुए 15 दिन में ही आख्या मांगी है। यूपीएसआइडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस प्रकरण की शिकायत की है।

शिकायत में कहा गया है कि अमित कुमार घोष ने यूपीएसआइडीसी के एमडी रहते दो अगस्त 2016 से 14 अप्रैल 2017 तक नियम के खिलाफ 1100 करोड़ रूपए के टेंडर बांटे। इनमें से जो काम 2016-17 की कार्ययोजना में नहीं थे, उनके भी टेंडर बांटे गए हैं। इनमें कानपुर की ट्रांस गंगा सिटी तथा इलाहाबाद की सरस्वती हाइ टेक सिटी के काम का जिक्र है।

इनमें 600 करोड़ रुपए की कंक्रीट की सड़क के काम पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। इस मामले में सीएम ने पूर्व एमडी अमित कुमार घोष को तलब भी किया था। इतना ही नहीं तमाम बड़े प्रोजेक्ट्स पर मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा किया गया है।

सीएम आफिस में की गई शिकायत के अनुसार आठ महीने के दौरान काम को छोड़कर सिर्फ टेंडर पर ही काम हुआ। इस दौरान काम वह हुए जो कार्ययोजना में ही नहीं थे। 2016-17 में 1668 एकड़ जमीन को विकसित करने के लिए 970 करोड़ रुपए का काम प्रस्तावित था, लेकिन सौ एकड़ जमीन भी विकसित नहीं की गई।

जिन ठेकेदारों को काम बांटा गया था, उनमें से अधिकांश की बैंक गारंटी ही फर्जी थी। इनमें भी कई ठेकेदार ऐसे हैं जो टेंडर से जुड़े मानक पूरे नहीं करते। इसके बाद भी उनको मोटे कमीशन के एवज में टेंडर दिया गया।

इस प्रकरण पर अमित कुमार घोष ने कहा कि मुझे अभी इस प्रकार की शिकायत तथा आदेश की कोई भी जानकारी नहीं है। जानकारी करने के बाद ही कोई बात कह सकूंगा।

source-DJ