प्रदेश में अब 102 व 108 एंबुलेंस के कर्मचारी 24 घंटे रहेंगे तैयार

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योगी सरकार ने 102 व 108 एंबुलेंस के कर्मचारी को 24 घंटे रहने का फरमान सुनाया है

प्रदेश की सभी चिकित्सा इकाइयों में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा से लाये जाने वाले मरीजों को 24 घंटे अटेंड करने के लिए अब कम से कम तीन अधिकारियों/कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अधिकारियों/कर्मचारियोंकी अधिकतम संख्या चिकित्सालय के आकार पर निर्भर करेगी। प्रत्येक रिपोर्टिंग अधिकारी/कर्मचारी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह मरीज को रिसीव, डिस्चार्ज करने व घर वापस छोड़ते समय पेशेंट केयर रिकार्ड (पीसीआर) और ड्रॉप बैक रिकार्ड (डीबीआर) पर दस्तखत करे।

हाल के दिनों में 102 व 108 एंबुलेंस सेवा में काफी अनियमितताएं और शिकायतें पाये जाने पर उन्हें अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने नए दिशानिर्देश जारी किये हैं। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने बताया कि दोनों ही एंबुलेंस सेवा के लिए अलग-अलग रजिस्टर भी रखने होंगे। इसके लिए आवश्यक प्रारूप भी निर्धारित कर दिये गए हंै। निर्धारित प्रारूप के अनुसार रजिस्टर तैयार कराने का पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित चिकित्सा इकाई के प्रभारी को सौंपा गया है। अभिलेखों में दर्ज सूचना वास्तविकता से अलग पाये जाने पर दोषी के खिलाफ सख्त दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।

चिकित्सालयों में ओपीडी रजिस्ट्रेशन, इनडोर तथा इमरजेंसी रजिस्टर में एंबुलेंस सेवा के लिए एक कालम अतिरिक्त जोड़ा जाएगा जिसमें एम्बुलेंस से चिकित्सालय लाये गये मरीज का केस आइडी अंकित किया जाएगा। साथ ही एंबुलेंस सेवाप्रदाता द्वारा लाभार्थियों के लिए एक यूनिक केस आइडी भी एलॉट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पीसीआर तथा डीबीआर को और अधिक सुदृढ़ व पारदर्शी बनाने के लिए रोगी तथा उनके परिवारीजन के पहचान पत्र के प्रकार व संख्या को सेवाप्रदाता द्वारा अंकित किया जाएगा।

एंबुलेंस के ड्राप बैक करने वाले रोगियों की पुष्टि भी आवश्यक रूप से करानी होगी। सेवाप्रदाता के लिए पीसीआर व डीबीआर की एक प्रति चिकित्सालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

प्रमुख सचिव ने बताया कि एंबुलेंस स्टाफ द्वारा रोगी को स्थल पर ही उपचार उपलब्ध करा देने के बाद यदि अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं होती है तो रोगियों की सूचना सेवाप्रदाता द्वारा तत्काल संबंधित पास की चिकित्सा इकाई पर देनी होगी। चिकित्सा इकाई के प्रभारी का दायित्व होगा कि वे इसके सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि समस्त चिकित्सा इकाइयों को आगामी माह की सात तारीख को निर्धारित प्रारूप में सूचनाएं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी समस्त सूचनाओं को प्रत्येक माह की दस तारीख को परिवार कल्याण महानिदेशालय में उपलब्ध कराएंगे। यदि निर्धारित तारीख तक सीएमओ द्वारा सूचना नहीं उपलब्ध कराई जाती है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।