अमरोहा में 100 बंदरों की मौत, जांच में जुटी टीम

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अमरोहा जिले के ढबरासी गांव में एक हफ्ते में 100 बंदरों की मौत की खबर से हड़कंप मचा गया है। बंदरों की मौत का वजह जानने के लिए पशु चिकित्सकों की टीम ने बंदरों का पोस्टमार्टम किया लेकिन पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है जिसके बाद जांच के लिए बरेली लैब भेजा गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सात आठ दिनों से लगातार बंदर मर रहे हैं। बंदर खूनी दस्त के बाद तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। रोजाना दस से बारह बंदर मर जाते हैं। बंदरों की मौत से लोग हैरान हैं। वहीं, बंदरों के प्रति आस्था रखने वाले लोगों में रोष भी है। इन्होंने जहर देकर मारने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही लोगों में दहशत भी बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर बंदरों की मौत किसी बीमारी से हो रही है तो कहीं यह ‌बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ना ले ले। वहीं, ग्राम प्रधान पति राजीव गोयल ने बताया कि गांव में अब तक करीब 100 बंदरों की मौत हो चुकी है। उन्होंने प्रशासन से बंदरों की मौत की जांच कराने की मांग उठाई है। अगर किसी ने जहर दिया है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. तेजपाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम में यह बात साबित हुई है कि बंदरों का पेट खाली था। यानी मरने से दो तीन दिन पहले से बंदरों ने कुछ खाया नहीं था। बंदर के फेफड़े और लीवर भी खराब मिले हैं। खूनी दस्त से बंदरों की मौत हो रही है। जहर देने की पुष्टि लैब में जांच के बाद ही हो सकेगी।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ब्रजवीर सिंह ने कहा- यहां बंदरों की काफी तादात है। सारे बंदर पहले अंधेरी बाग में रहते थे बाग कटने के बाद बंदर आबादी वाले क्षेत्र में आ गए हैं। बंदरों के उत्पात से लोग परेशान रहते हैं, लेकिन बंदरों की मौत से ग्रामीण सकते में है। बंदरों की मौत पर टीम गठित की गयी है जिन्होंने बंदरों का पोस्टमार्टम किया है। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद बंदरों का बिसरा आरवीआई बरेली भेजा गया है। जिससे बंदरों की मौत का सच सामने आ सकेगा। वहीं, जो बंदर बीमार हैं उनका इलाज किया जा रहा है।

एसडीओ एके सिंह ने कहा कि उन्हें बंदरों की मौत के बारे में जानकारी नहीं है। वन रेंजर को जानकारी कर कार्रवाई करेंगे।