सुभासपा, भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा सकती है?

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लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बीच रिश्तों में दूरी इतनी बढ़ चुकी है कि अब इन दोनों का करीब आना मुश्किल दिख रहा है। भाजपा ने जहां ओम प्रकाश राजभर को महत्व देना बंद कर दिया है वहीं सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर अब खुल कर कह रहे हैं कि भाजपा पूर्वांचल की 30 सीटों में से महज तीन सीटें ही जीत पाएगी। राजभर ने राज्य में आखिरी तीन चरणों के चुनाव के लिए अपने 39 उम्मीदवार भी उतार दिए हैं जो भाजपा के खिलाफ लड़ेंगे। अब सवाल उठता है कि राजभर की पार्टी के यह उम्मीदवार भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ओपी राजभर की ताकत समझने के लिए हमें साल 2012, 2014 और 2017 के चुनाव नतीजों के आंकड़ों पर गौर करना होगा। 2012 के विधानसभा चुनाव में बलिया, गाज़ीपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी जैसी पूर्वांचल की तकरीबन 20 विधानसभा सीटों पर सुभासपा के प्रत्याशियों को लगभग 18 हज़ार से 50000 तक वोट मिले। सीट कोई भी भले नहीं मिल पाई लेकिन इतने वोटों से सुभासपा की ताकत का एहसास सबको हो गया।

2014 के लोकसभा चुनाव में सुभासपा ने कौमी एकता दल के साथ गठबंधन किया और इस गठबंधन से बलिया से अफ़ज़ाल अंसारी और सलेमपुर से खुद ओम प्रकाश राजभर उम्मीदवार हुए। अफ़ज़ाल को जहां एक 1.63 लाख यानी 17.40 प्रतिशत वोट मिले वहीं ओम प्रकाश राजभर को तकरीबन 68 हज़ार वोट मिले। चंदौली में भी सुभासपा उम्मीदवार को एक लाख से ज्यादा वोट मिले।

राजभर की पार्टी की इस ताकत को भाजपा ने भांप लिया और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-सुभासपा का गठबंधन हुआ। भाजपा ने सुभासपा को 8 सीटें दी, जिनमें 4 सीटों पर सुभासपा को जीत मिली। ओम प्रकाश राजभर राज्य में कैबिनेट मंत्री भी बने। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के आगे विपक्ष जैसे साफ हो गया। राजभर कहते हैं कि उनकी वजह से भाजपा को लगभर सवा सौ सीटों पर जीत मिली।

इसी ताकत की वजह से सुभासपा 2019 के चुनाव में टिकट पाने के लिए भाजपा पर दबाव भी बनाने लगी, लेकिन भाजपा हर चुनाव के लिए अपनी अलग रणनीति बनाती है और उसने इस बार सुभासपा को तवज्जो नहीं दी। भाजपा ने राजभर फैक्टर की काट के लिए अनिल राजभर जैसे नेताओं को आगे किया, निषाद पार्टी को साथ लिया। बावजूद इसके सुभासपा पूर्वांचल की कई सीटों पर भाजपा को नुकसान कर सकती है।

राजभर की नाराजगी का खामियाजा भाजपा को गाजीपुर, बलिया, मऊ, घोसी, सलेमपुर, जौनपुर, चंदौली, आज़मगढ़ जैसी सीटों पर उठाना पड़ सकता है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अपने दम पर भले ही एक भी जगह चुनाव जीतने की ताकत नहीं रखती है, लेकिन वह भाजपा की राह बहुत ही मुश्किल जरूर कर सकती है क्योंकि राजभर के उम्मीदवार उतने वोट तो खींचेंगे कि जितना कि आमतौर पर हार-जीत का अंतर होता है।