वाराणसी के मणिकर्णिका महाश्मशान पर भक्तों ने खेली चिता भस्म की होली

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वाराणसी में आज भक्तों ने महाश्मशाननाथ (शिव रूप) का पूजन कर अनुष्ठान शुरू करने के साथ रंगभरी एकादशी के बाद के निभाए विधान|
मान्यता है कि गौने के दूसरे दिन बाबा अपने भक्तों के बीच आते हैं और उनके साथ अलग उत्सव मनाते हैं। आज वहां जलती चिताओं के बीच महाश्मशान पर भस्म व अबीर से होली खेली गई। परंपरा के अनुसार पहले बाबा मसाननाथ को भस्म औऱ अबीर चढ़ाई गई, इसके बाद एक दूसरे को भस्म लगाने का क्रम शुरू हुआ। काशी की इस अद्भुत होली मे शवों का अंतिम संस्कार करने आए लोग भी शामिल हुए|

राग और विराग की नगरी काशी में मणिकर्णिका घाट पर महाश्मशान पर बाबा भोले के भक्तों ने चिता भस्म की होली खेली। इसके साथ ही महाश्मशाननाथ का पूजन कर होली और अन्‍य के अनुष्ठान शुरू किए। काशी की यह रंगभरी एकादशी के बाद विधान युगों पुरानी मानी जाती है। मान्यता है अपने गौना के दूसरे दिन बाबा भक्तों और अपने गण यानि भूतों व औघडों के बीच आते हैं और उनके साथ अलग उत्सव मनाते हैं। इसी परंपरा के निर्वहन में रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन भक्तों ने महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर भस्म व अबीर से होली खेली। परंपरा के अनुसार पहले शिव के ही अंश माने जाने वाले बाबा मसाननाथ को भस्म औऱ अबीर चढ़ाकर भक्‍तों ने एक दूसरे को भस्म लगाया। काशी की इस अद्भुत होली मे शव का अंतिम संस्कार करने आए लोग भी काफी खुश होकर शामिल हुए|