योगी सरकार करेगी बचत, इन जगहों पर होगी खर्च में कटौती, घटेंगी सरकारी नौकरियां

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उत्तर प्रदेश में हाल के कुछ महीनों में सरकारी नौकरियों में काफी नियुक्तियां हुईं हैं और नई भर्तियां भी आई हैं लेकिन लगता है कि अब सरकार इन पर अंकुश लगाने की तैयारी में है। दरअसल यूपी सरकार ने अब बचत की तरफ कदम बढ़ाया है और इसके लिए खर्चों में कमी करने के कई उपाय किए गए हैं, इनमें एक यह भी है कि नियमित नौकरियों में कटौती की जाएगी।

राज्य के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय की तरफ से मंगलवार को राज्य के सभी विभागों को आदेश जारी कर खर्चों में बचत करने को कहा गया है। कहा गया है कि किसी भी तरह के अनावश्यक खर्चे न किए जाएं। चिकित्सा और पुलिस विभाग को छोड़कर किसी और विभाग में सामान्यत: नए पद मंजूर न किए जाएं। इसके अलावा विभागों में दैनिक वेतन और संविदा पर कर्मचारियों को रखने पर लगी रोक बरकरार रहेगी। बहुत जरूरत हुई तो बाहर की एजेंसी से कांट्रैक्ट पर लोग रखे जा सकेंगे।

हवाला दिया गया है कि कम्प्यूटराइजेशन होने के बाद से विभागों में काम का बोझ कम हो गया है। इसलिए अनुपयोगी पदों को समाप्त कर दिया जाए और ऐसे पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों को दूसरे विभागों में समायोजित कर दिया जाए। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अध्यापक-छात्र अनुपात का कड़ाई से पालन किया जाएगा और बिना जरूरत के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ा रहे सरप्लस शिक्षकों को वहां से हटाकर किसी दूसरे विद्यालय में समायोजन किया जाएगा।

सरकार अब कई पदों, खासतौर पर ड्राइवर, माली, वायरमैन, इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर, मिस्त्री, लिफ्टमैन, एसी मैकेनिक के पदों पर नियुक्तियों की बजाय आउटसोर्स से काम चलाएगी। आउटसोर्सिंग भी वित्त विभाग की सहमति से ही की जाएगी। इसके अलावा सलाहकार, अध्यक्ष और सदस्य जैसे अस्थायी पदों पर रखे गए लोगों को अब नियमित स्टाफ नहीं मिलेगा।

सरकारी अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वो बिना जरूरत विदेश यात्रा पर न जाएं और जरूरी होने पर बिजनेस की बजाए इकोनमी क्लास की ही यात्रा करें। विज्ञापन, लेखन सामग्री, कार्यालय व्यय, आतिथ्य व्यय, फर्नीचर, सजावट में भी मितव्ययता बरतने को कहा गया है। सरकारी आयोजन निजी होटलों की बजाए राजकीय अतिथि गृहों, सरकारी भवनों में कराने, राजकीय भोज को भी पांच सितारा होटलों में नहीं कराने को कहा गया है, बहुत जरूरी होने पर संबंधित विभाग को मुख्य सचिव से मंजूरी लेनी पड़ेगी।

नई गाड़ियां खरीदने के बजाय आउटसोर्सिंग से काम चलाया जाएगा। सरकारी विभागों में नए साल के कैलेंडर, डायरी और पर्सनल लेटर की छपाई, वितरण पर भी रोक लगा दी गई है। यह निर्देश स्वायत्त संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, कालेजों पर भी लागू होगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल सरकार बनने के साथ ही अफसरों को अनावश्यक खर्चों में कटौती के आदेश दिए थे ताकि जन कल्याण की योजनाओं में ज्यादा खर्च किया जा सके। इसके लिए एक कमेटी भी गठित की गई थी और इस कमेटी की सलाह पर ही सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार ने अपने पहले ही बजट में ही किसानों की कर्जमाफी के लिए 36 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। और भी कई जन कल्याण की योजनाएं लागू की जानी हैं लेकिन सरकार के पास आमदनी के सीमित साधन हैं, लिहाजा अनावश्यक खर्चों में कटौती करके बचत का प्रयास किया जा रहा है।