भारत ने पकिस्तान को दी शिकस्त , नहीं होगा सार्क सम्मलेन

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आतंकवाद को बढ़ावा देने को लेकर दुनियाभर में किरकिरी झेल रहे पाकिस्तान को एक और करारा झटका लगा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि आठ में से चार देशों के मना करने के बाद पाकिस्तान में होने वाला सार्क सम्मेलन रद हो गया है।

गौरतलब है कि सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में 9 और 10 नवंबर को होना था। सूत्रों के मुताबिक भारत के बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान द्वारा सार्क सम्मेलन के बहिष्कार के बाद सार्क सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। इससे पहले उड़ी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है जिसके चलते मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने इस आशय की पुष्टि कर दी। इस ऐलान के बाद अफगानिस्तान, भूटान बांग्लादेश ने भी सार्क सम्मेलन के बहिष्कार का फैसला किया।

आपको बता दें कि सार्क के संविधान के मुताबिक अगर कोई भी सदस्य देश सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेता तो सम्मेलन स्वत: ही या तो रद हो जाएगा या फिर उसकी तारीख आगे बढ़ा दी जाएगी।

इससे पहले श्रीलंका ने भी साफ कर दिया था कि अगर भारत सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहा है तो इस सम्मेलन का कोई मतलब नहीं रह जाता।

आपको बता दें कि पठानकोट और फिर हाल ही में उड़ी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खी और बढ़ गई है। पीएम मोदी कह चुके हैं कि पाकिस्तान अगर अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो वो वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग कर देंगे।

भारत के मना करने के बाद जिस तरह सार्क के साथी देशों ने सम्मेलन का बहिष्कार किया है उससे पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर करारी शिकस्त मिली है।

जीडीपी के हिसाब से सार्क की इकोनॉमी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सार्क के सदस्य देश दुनिया के तीन फीसदी दायरे में फैले हुए हैं और दुनिया की पूरी आबादी का करीब 21 फीसदी हिस्सा इन देशों में रहता है। इन आठ देशों में भारत का क्षेत्रफल और आबादी 70 फीसदी से भी ज्यादा है।

2005-10 के दौरान सार्क की औसत जीडीपी ग्रोथ रेट 8.8 फीसदी प्रतिवर्ष थी लेकिन 2011 में यह घटकर 6.5 फीसदी रह गई। यह भारत में आर्थिक मंदी का असर था क्योंकि सार्क की कुल इकोनॉमी का करीब 80 फीसदी भारत के हिस्से में है।

 

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