नौकरशाही की बड़ी लापरवाही:ट्रामा सेंटर ले जानें के लिए मिली एम्बुलेंस, इलाज के अभाव में वृद्ध की मौत

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अमेठी. यूपी में योगी राज आते ही जहाँ सुस्त पड़ी नौकरशाही दौड़ती दिखी लेकिन वहीं कुछ जगहों पर अभी पुरानी आदतें बाकी है। तभी तो
घायल वृद्ध को ट्रामा सेंटर ले जानें के लिए स्वास्थ्य अधिकारी एक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं करा सके। नतीजतन वृद्ध ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया।
*इस तरह घटना पाई अंजाम*
घटना मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के
कादूनाला के पास की है।
पूरे दलाई गाँव निवासी रामनारायण 65 को अज्ञात वाहन टक्कर मारता है।
चोटहिल अवस्था में वृद्ध को 108 एंबुलेंस द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुसाफिरखाना लाया जाता है।
प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर वृद्ध को ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं।
लेकिन घायल वृद्ध को प्रशासनिक तौर पर ट्रामा सेंटर ले जाने के लिए कोई भी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं मिल सकी।

*सीएमओ ने सीयूजी नम्बर कर रखा था बंद*
नतीजा घायल वृद्ध को ट्रामा सेंटर ले जाने के लिए जन सामान्य के लोगों ने मुख्य चिकित्साधिकारी आनंद ओझा का मोबाइल नंबर पर फोन किया। लेकिन साहब पर अफसरशाही का इतना भूत चढ़ा था के उन्होंने फोन स्विच ऑफ कर रखा था।
पीड़ित पक्ष की माने तो यदि मुख्य चिकित्सा अधिकारी 108 नंबर एंबुलेंस के ड्राइवर को ट्रामा सेंटर ले जाने का निर्देश देते तो मृतक की जान बचाई जा सकती थी।
किंतु फोन न लगने के कारण मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमेठी द्वारा पर्याप्त निर्देश नहीं जारी किया जा सका और इस कारण इलाज के अभाव में वृद्ध की मौत हुई।

*डीएम ने नहीं रिसीव किया था फोन*
बड़ा मामला ये के पीड़ित पक्ष के तरफ से इस मामले में जब जिलाअधिकारी अमेठी को फोन लगाया गया तो जिलाधिकारी अमेठी ने फोन को रिसीव नहीं किया। जिसके कारण जिलाधिकारी स्तर पर घायल व्यक्ति को एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई जा सकी।
काफी प्रयास के बाद निजी गाड़ी की व्यवस्था होने पर घायल व्यक्ति को ट्रामा सेंटर के लिए ले जाया जा रहा था कि जगदीशपुर के पास पहुंचते ही मौत हो गई।
बता दें के घायल रामनारायण यादव पूर्व कानूनगो के पद पर भी रह चुका है।

*बोलने से कतरा रहे ज़िम्मेदार अधिकारी*
वहीं इस दुर्घटना में पीडित का कहना है के अमेठी जिले के पुलिस अधीक्षक को छोड़कर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने तत्परता नहीं दिखाई।
ऐसे में फोन न सुने जाने के कारण घायल व्यक्ति की मौत हो गयी।
ऐसे में परिजन लापरवाही के जिम्मेदार अमेठी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी व जिला अधिकारी योगेश कुमार को मान रहे हैं।
और अब इस मुद्दे पर बात करने से दोनों ही अधिकारी कतरा रहे हैं।