डीएनडी स्कैम देश में पीपीपी मॉडल का भ्रष्टतम उदाहरण

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनता के हित को देखते हुए नोएडा के डीएनडी टोल वसूली को अवैध और मनमना करार देते हुए रोक लगा दी.

लेकिन पीपीपी मॉडल के तहत बने इस फ्लाईओवर के पीछे भ्रष्टाचार की कई कड़ियां जुडी हैं. या यह कहें कि देश में पीपीपी मॉडल के तहत बन रहे सभी प्रोजेक्ट्स में यह एक भ्रष्टतम उदाहरण है.

क्या है डीएनडी भ्रष्टाचार का सरकारी गठजोड़

पूरे मामले में नोएडा अथॉरिटी और उसके अधिकारीयों की मिलीभगत सामने आ रही है. नियम के मुताबिक टोल वसूलने का काम अलग कंपनी को देना था, लेकिन वसूली डीएनडी की ही एक कंपनी को दिया गया.

डीएनडी की कंपनी NTBCL को 99 एकड़ ज़मीन दी गई जिसकी आज की कीमत 2 हजार करोड़ है. इसमें 65 एकड़ दिल्ली की तरफ है.

2070 तक थी लूटने की योजना

ये शातिर अधिकारी कन्शेसन अवधि बढ़ाने के लिए टोल टैक्स कम दिखाते थे. ताकि वर्ष 2070 तक डीएनडी पर अरबों की वसूली जारी रख सके. प्रतिदिन टोल कलेक्शन दिखाते थे 25 लाख, लेकिन एनजीओ के सर्वे में पता चला कि 60 लाख रोजाना टोल वसूला जाता था.

409 करोड़ की लगत को 3200 करोड़ कर दिया

डीएनडी की लागत 409 करोड़ तय थी, लेकिन बेईमान अफसरों ने इसे 3200 करोड़ कर दिया. साइन वही आईएएस कर रहे थे जो अब कंपनी में डायरेक्टर और चेयरमैन हैं.

इस पूरे गोरखधंधे में यूपी और दिल्ली के आईएएस अधिकारी थे. जो सर्कार में रहकर पहले पीपीपी में मनमानी मंजूरी दी और फिर रिटायरमेंट होने के बाद कंपनी में घुस कर मालिक बन गए.

डीएनडी भ्रष्टाचार में यूपी के 3 आईएएस शामिल थे. आईएएस हरीश माथुर तब नोएडा अथॉरिटी में थे अब डीएनडी के सीईओ हैं. तत्कालीन दिल्ली पीडब्लूडी सचिव सनत कौल अब डीएनडी में डाइरेक्टर हैं.

यूपी के तत्कालीन मुख्यसचिव राज भार्गव अब डीएनडी के चेयरमैन हैं. तत्कालीन आईएस पियूष मनकन भी कंपनी में डायरेक्टर हैं