केशव प्रसाद मौर्य ने सहयोगी सुभासपा और अपना दल की नाराजगी की खबरों पर दिया बड़ा बयान

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जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं भाजपा के सहयोगी आंखें दिखा रहे हैं, भाजपा ने हाल में शिवसेना को शांत कराया, फिर यूपी में ओम प्रकाश राजभर को मनाने की कोशिश की जिसमें थोड़ी सफलता भी मिली लेकिन अब एक और पुरानी सहयोगी पार्टी अपना दल नाराज हो गई है। अपना दल की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने नाराजगी में कह दिया है कि उनकी पार्टी अब फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। सहयोगियों की इस नाराजगी के बीच राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दिया है बड़ा बयान।


उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ भाजपा का गठबंधन पहले की तरह जारी रहेगा। इतना ही नहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यह गठबंधन 73 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करेगा। एक इंटरव्यू में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा का गठबंधन 2014 से ही अपना दल के साथ है और वह बना रहेगा। इसी तरह से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ भी गठबंधन बना रहेगा।


केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान अहम है क्योंकि इन दोनों पार्टियों को भाजपा के साथ जोड़ने में उनकी ही बड़ी भूमिका रही है। अपना दल के साथ मिल कर भाजपा ने 2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 73 पर जीत दर्ज की थी, और 2017 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी साथ आ गई तो विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को 325 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।


अब अपना दल जहां लगातार प्रदेश की योगी सरकार और भाजपा की राज्य इकाई पर उपेक्षा का आरोप लगा रहा है, वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर ओबीसी आरक्षण में बंटवारे के लिए आंदोलनरत हैं। इन दोनों दलों ने भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर पुनर्विचार करने की बात भी कही है। चर्चाएं हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 26 फरवरी को इन दोनों दलों से बात करेंगे। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि दोनों हमारे सहयोगी दल हैं और ऐसे में उनके नेता हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं।


जाहिर यूपी में भाजपा की सियासत के लिए ये दोनों पार्टियां काफी अहम हैं, क्योंकि सपा-बसपा गठबंधन के बाद भाजपा अगर इन दोनों दलों को साथ नहीं रख पाई तो आगामी लोकसभा चुनाव में उसे काफी दिक्कत हो सकती है। सुभासपा और अपना दल का पूर्वांचल में अच्छा-खासा प्रभाव है और ये लगभग सभी सीटों पर प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा इन्हें मना पाती है या नहीं।