कांग्रेस-बीएसपी में और बढ़ी दूरियां, कांग्रेस ने कहा छत्तीसगढ़ में इसलिए नहीं हो पाया गठबंधन

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बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ गठबंधन करने और राज्य में 35 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि उनकी पार्टी मध्य प्रदेश और राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ेगी। मायावती के इस फैसले को कांग्रेस को बड़े झटके के रूप में देखा गया और इसे कांग्रेस की रणनीतिक चूक के रूप में देखा गया, लेकिन अब कांग्रेस ने साफ किया है कि उससे गठबंधन क्यों नहीं हो सका।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मायावती पर कई तरह के दबाव पड़े थे जिसकी वजह से उन्हें जोगी के साथ जाने का फैसला लेना पड़ा। कांग्रेस के मुताबिक मायावती के भाई के पीछे कथित तौर पर सीबीआई और ईडी का लगना प्रमुख कारण रहा जिससे उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि सीबीआई और ईडी के दबाव के चलते ही मायावती, कांग्रेस के साथ बातचीत से पीछे हटीं हैं। भूपेश बघेल के मुताबिक मायावती ने मोदी सरकार और बीजेपी को अंबेडकर तथा संविधान विरोधी बताते हुए कांग्रेस से बातचीत शुरू की थी, लेकिन अचानक पीछे हट गईं। बघेल का दावा है कि जब छत्तीसगढ़ बीएसपी अध्यक्ष ओपी वाजपेयी और पार्टी इंचार्ज बीएल भारती ने मायावती की तरफ से उनसे संपर्क किया तभी उन्होंने कहा था कि हमारे प्रदेश में मायावती का ट्रैक रिकॉर्ड बीजेपी को मदद करने वाला रहा है। जोगी भी ऐसा ही करते रहे हैं।
छत्तीसगढ़ मामले के बाद कांग्रेस अब मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी बीएसपी के साथ चलने की बजाय अकेले बढ़ने की तैयारी में जुट गई है। कांग्रेस नेता हवाला दे रहे हैं कि पंजाब विधानसभा चुनावों में बीएसपी और आम आदमी पार्टी दोनों ने ही अकेले चुनाव लड़ा था। बीजेपी को उम्मीद थी कि ये दोनों मिलकर कांग्रेस की रणनीति को बर्बाद कर देंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उनके मुताबिक कांग्रेस का कैडर एकजुट होकर लड़ेगा तो उसे कोई रोक नहीं सकेगा।